- रजिस्ट्री जांच में खुलासा, मोहल्लालगंज समेत कई क्षेत्रों की जमीनों में लगाई गई काली कमाई
- कोरोना काल बना कुबेर काल
लखनऊ। राज्य वसूली एवं सेवा कर (GST) विभाग में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। विभाग के लगभग 50 अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने 200 करोड़ रुपये से अधिक की जमीनें खरीदीं। यह जमीनें विशेषकर मोहल्लालगंज, गोसाईंगंज, बख्शी का तालाब, बीकेटी और सरोजिनी नगर क्षेत्र में खरीदी गईं।
जांच में कैसे हुआ खुलासा?
•विभागीय व विशेष जांच दल ने रजिस्ट्री दस्तावेजों की पड़ताल की।
•पाया गया कि कई जमीनें फर्जी नामों व रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गईं।
•किसानों से जमीनें कौड़ियों के भाव लेकर आगे महंगे दामों पर बेची गईं।
•वास्तविक मूल्य से कम कीमत दिखाकर भारी स्टांप ड्यूटी और टैक्स की चोरी की गई।
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कौन-कौन आए घेरे में?
जांच रिपोर्ट में शामिल नामों में –
•सहायक आयुक्त, संयुक्त आयुक्त और राज्य कर अधिकारी तक शामिल हैं।
•कई अधिकारियों ने अपनी संपत्ति पत्नी, भाई, बेटे और रिश्तेदारों के नाम पर खड़ी की।
•सूत्रों के मुताबिक, कम से कम 50 अफसर सीधे संलिप्त पाए गए हैं।
कोरोना काल बना कुबेर काल
•कोरोना महामारी के दौरान जब लोग आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, तब इन अफसरों ने मौके का फायदा उठाया।
•किसानों से जमीनें सस्ती दरों पर खरीद ली गईं।
•लॉकडाउन की आड़ में इन अफसरों ने अपनी काली कमाई को जमीन में खपाया।
•विभागीय सूत्र मानते हैं कि इसी दौरान कई अफसर रातों-रात करोड़पति बन गए।
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अब आगे क्या?
•जांच टीम ने संबंधित अफसरों के बैंक खातों और संपत्ति विवरण खंगालना शुरू कर दिया है।
•दोषी पाए जाने पर न सिर्फ विभागीय कार्रवाई होगी बल्कि मामला ED और आयकर विभाग तक भी जाएगा।
•भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी मुकदमा दर्ज हो सकता है।
निष्कर्ष
200 करोड़ रुपये की जमीन खरीद मामले में GST विभाग के लगभग 50 अफसर जांच के घेरे में आ चुके हैं।
यह मामला साबित करता है कि कोरोना काल में जब आम जनता रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए जूझ रही थी, तब सरकारी अफसरों ने उसे अपनी कमाई का सुनहरा अवसर बना लिया।
Author: nationstationnews
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