15 साल बाद बड़ा बदलाव: सिटी ट्रांसपोर्ट के परिचालक फिर से UPSRTC में बहाल, MD ने किया ऐलान

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  • UPSRTC का बड़ा फैसला: महानगर परिवहन सेवा के सभी परिचालक दोबारा सेवा में लिए जाएंगे, बेरोजगारों को मिलेगी राहत
  • UPSRTC ने वर्ष 2007–08 में साफ़ किए गए महानगर परिवहन सेवा के परिचालकों को दोबारा सेवा में शामिल करने का निर्णय लिया। पहले चरण में 288 बकाया कर्मचारियों की जांच पूरी होने के बाद पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होगी।

न्यूज़ डेस्क 

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लखनऊ, 21 नवम्बर 2025: उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (UPSRTC) ने महानगर परिवहन सेवा में कार्यरत संविदा परिचालकों को पुनः निगम में सेवा में रखने का निर्णय लिया है। यह निर्णय निगम की ओर से संचालित बसों में परिचालकों की कमी को पूरा करने तथा लंबे समय से बेरोज़गार परिचालकों को पुनः रोजगार देने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इस संबंध में परिवहन निगम के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री प्रभु एन. सिंह ने विस्तृत जानकारी दी।

निर्णय का कारण और पृष्ठभूमि

श्री प्रभु एन. सिंह ने बताया कि वर्ष 2009 में नगरीय विकास विभाग के अंतर्गत विभिन्न महानगरों में महानगर परिवहन सेवा (City Transport Services) की स्थापना की गई थी और सीNG/डीज़ल से चलने वाले वाहनों का संचालन आरम्भ हुआ था। इन वाहनों का संचालन निगम के अधिकारियों एवं पर्यवेक्षकों के मार्गदर्शन में किया जाता था और परिचालक सीधे निगम स्तर पर ही रखे जाते थे — न कि किसी सेवाप्रदाता के माध्यम से।

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हाल के वर्षों में सिटी ट्रान्सपोर्ट सर्विसेज़ लिमिटेड (CTSL) में परिसंपत्तियों की आयु पूरा होने के कारण उनके कई वाहनों का परिचालन बंद हो चुका है और कई बसों को नीलाम किया जा रहा है। CTSL में लंबे समय (लगभग 15 वर्ष से अधिक) तक परिचालन का अनुभव रखने वाले कई संविदा परिचालक अब बेरोज़गार हैं। ऐसे में निगम ने इन अनुभवी परिचालकों को निगम स्तर पर पुनः नियुक्त कराना उपयुक्त और तर्कसंगत माना है।

कौन लाभान्वित होंगे — पात्रता व शर्तें

एमडी ने बताया कि पुनः नियुक्ति के प्रस्ताव में निम्नलिखित मानक व शर्तें निर्धारित की गई हैं:

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  • परिचालक पूर्व में UPSRTC द्वारा सीधे रखे गए संविदा परिचालक होने चाहिए और उनकी प्रतिभूति राशि निगम में जमा हो चुकी हो।
  • पुनः सेवा में रखे जाने के इच्छुक परिचालकों के पास वैध परिचालक लाइसेंस अनिवार्य होगा।
  • उनके विरुद्ध कोई अनुशासनिक प्रकरण या विधिक वाद लंबित नहीं होना चाहिए।
  • परिचालक की अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) अवधि खण्डित नहीं होनी चाहिए।
  • शैक्षणिक योग्यता इण्टरमीडियेट (या निगम द्वारा निर्धारित समकक्ष योग्यता) अनिवार्य मानी जाएगी।
  • परिचालक के पास केंद्र/राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थाओं से प्राप्त “सीसीसी” (CCC) कंप्यूटर प्रमाण पत्र होना आवश्यक है।
  • जिन परिचालकों के पास अभी CCC प्रमाण पत्र नहीं है, उन्हें प्रथम चरण में 06 माह का अतिरिक्त समय दिया जाएगा ताकि वे आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकें।

एमडी ने आगे बताया कि पुनः सेवा में रखे गए परिचालकों की वरिष्ठता (seniority) नए अनुबंध निष्पादित होने के उपरांत और कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से मानी जाएगी।

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मुख्य उद्देश्य और अपेक्षित परिणाम

परिवहन निगम के अनुसार यह निर्णय दो दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण है:

  1. रोजगार सृजन: बड़ी संख्या में अनुभवी परिचालक जो लंबे समय से बेरोज़गार थे, उन्हें पुनः सेवा में रख कर आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा।
  2. प्रचालन क्षमता में वृद्धि: निगम को परिचालकों की कमी का समाधान मिलेगा और नगर व अंतरनगरीय परिवहन सेवाओं के संचालन में मजबूती आएगी।

एमडी श्री प्रभु एन. सिंह ने कहा, “CTSL में कार्यरत परिचालकों के पास वर्षों का परिचालन अनुभव है। निगम स्तर पर निर्धारित शर्तों के अधीन उन्हें पुनः सेवा में रखना तर्कसंगत है — इससे न केवल परिचालकों को रोजगार मिलेगा बल्कि परिवहन सेवाओं में भी स्थिरता आएगी।”

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आगे की प्रक्रिया

  • प्रस्ताव को संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष अनुमोदनार्थ प्रस्तुत किया गया है और अनुमोदन प्राप्ति के बाद नियुक्ति प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी जाएगी।
  • जिन परिचालकों के पास आवश्यक कागजात (लाइसेंस, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, CCC आदि) उपस्थित हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
  • अधिक जानकारी व संपर्क के लिए अधिकारी: आशीष सिंह (संपर्क सूत्र), सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, UPSRTC।

नोट: इससे पहले UPSRTC ने संविदा आधार पर सीधे रखे गए परिचालकों की प्रतिभूति राशि संग्रहित रखी हुई थी—इसी को ध्यान में रखकर पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा रहा है। यह कदम नगरीय परिवहन सेवाओं के पुनरुद्धार और परिचालक समुदाय के आर्थिक पुनर्स्थापन की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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