100 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण को पार करने वाला SBI बना भारत का पहला सरकारी बैंक

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  • शेयर में उछाल के साथ SBI ने हासिल किया ऐतिहासिक मुकाम
  • 100 लाख करोड़ रुपये का कुल कारोबार पार, निवेशकों का भरोसा बढ़ा
  • दूसरी तिमाही में ₹20,160 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज, एनपीए घटा
  • रिलायंस, HDFC, TCS और ICICI के बाद SBI भी 100 अरब डॉलर क्लब में शामिल

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नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक — भारतीय स्टेट बैंक (SBI) — ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 100 अरब डॉलर (लगभग ₹8.85 लाख करोड़) का मार्केट कैप पार कर लिया है। इसके साथ ही SBI भारत का पहला सरकारी बैंक बन गया है जिसने यह मुकाम हासिल किया है।

शेयर में तेज़ी, निवेशकों का भरोसा बढ़ा

बैंक के शेयर में 6 नवंबर को 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। यह तेजी बैंक के बेहतर तिमाही नतीजों और मज़बूत वित्तीय प्रदर्शन के चलते देखने को मिली। निवेशकों का मानना है कि बैंक की बैलेंस शीट लगातार मजबूत हो रही है और डिजिटल बैंकिंग क्षेत्र में इसकी पकड़ और सुदृढ़ हो रही है।

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मजबूत नतीजे और वित्तीय स्थिति

दूसरी तिमाही (Q2 FY26) के नतीजों में SBI का शुद्ध लाभ ₹20,160 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में करीब 10 प्रतिशत अधिक है।

बैंक की ग्रॉस एनपीए दर 2.28% और नेट एनपीए दर 0.57% पर आ गई है — जो अब तक का सर्वश्रेष्ठ स्तर माना जा रहा है।

SBI का कुल व्यवसाय (डिपॉज़िट्स + लोन) अब ₹100 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर चुका है।

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वैश्विक स्तर पर भी बढ़ी साख

SBI अब उन चुनिंदा भारतीय कंपनियों में शामिल हो गया है जिनका मार्केट कैप 100 अरब डॉलर से अधिक है — इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज़, HDFC बैंक, TCS, एयरटेल और ICICI बैंक पहले से शामिल हैं।

बैंक ने यह भी लक्ष्य रखा है कि 2030 तक वह दुनिया के शीर्ष 10 बैंकों में अपनी जगह बनाएगा।

प्रबंधन का बयान

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SBI के प्रबंध निदेशक सी.एस. सेठी ने कहा —

“यह उपलब्धि न सिर्फ निवेशकों के भरोसे का प्रमाण है, बल्कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर की मजबूती का भी प्रतीक है। आने वाले वर्षों में हम वैश्विक स्तर पर शीर्ष बैंकों में शामिल होने की दिशा में अग्रसर रहेंगे।”

आगे की रणनीति

बैंक अब डिजिटल लोनिंग, ग्रामीण बैंकिंग और एग्री-फिनटेक पर अधिक ध्यान केंद्रित करेगा। इसके साथ ही पूंजी पर्याप्तता और जोखिम प्रबंधन के मानकों को और मजबूत करने की योजना है।

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निष्कर्ष

SBI की यह ऐतिहासिक छलांग न केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले वर्षों में SBI एशिया के शीर्ष बैंकों की सूची में शुमार हो सकता है।

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