- भारत में सोने की कीमत ने फिर छुआ नया शिखर, 1.3 लाख के पार पहुँचे भाव
16 अक्टूबर 2025 को भारत के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में चौथे लगातार सत्र के लिए उछाल जारी रहा। त्योहारों की मांग, बढ़ती निवेशक दिलचस्पी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने सोने को एक बार फिर महँगा बना दिया है।
देशभर में 24 कैरेट सोने की औसत दर ₹12,962 प्रति ग्राम (यानी ₹1,29,620 प्रति 10 ग्राम) पर पहुँच गई, जबकि 22 कैरेट सोना ₹11,882 प्रति ग्राम (₹1,18,820 प्रति 10 ग्राम) के स्तर तक चढ़ गया है ।
शहरवार सोने का भाव
• मुंबई में 24 कैरेट सोना ₹13,092 प्रति ग्राम
• चेन्नई में ₹13,117 प्रति ग्राम
• बेंगलुरु में ₹13,121 प्रति ग्राम
• दिल्ली में ₹12,654 प्रति ग्राम
• हैदराबाद में ₹13,099 प्रति ग्राम
• केरल में ₹12,626 प्रति ग्राम[5paisa]
चांदी की बात करें तो राष्ट्रीय राजधानी में यह ₹1,68,000 प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही है ।
उछाल के प्रमुख कारण
1. त्योहारी सीजन की मांग:
नवरात्रि और धनतेरस के दौरान ज्वेलरी की परंपरागत खरीदारी बढ़ी है। इससे खुदरा बाजार में सोने की मांग तेज हो गई है ।
2. वैश्विक आर्थिक अस्थिरता:
रूस-यूक्रेन और इज़राइल-हमास संघर्ष के चलते निवेशकों में सुरक्षा की तलाश जारी है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनावों ने भी सेफ-हेवन गोल्ड की मांग को बढ़ाया है ।
3. डॉलर की कमजोरी और ब्याज दरों में कटौती:
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दर कटौती और डॉलर के कमजोर होने के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना महंगा हुआ, और इसका सीधा असर भारतीय कीमतों पर पड़ा ।
4. केंद्रीय बैंकों की भारी खरीदारी:
इस वर्ष भारत, चीन और तुर्की जैसे देशों ने डॉलर निर्भरता घटाने के लिए भारी मात्रा में गोल्ड रिज़र्व बढ़ाया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतें नई ऊँचाई पर पहुँचीं ।
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निवेशकों के लिए संकेत
सोना अब केवल ज्वेलरी नहीं रहा, बल्कि एक मजबूत निवेश विकल्प बन गया है। बढ़ती महँगाई और रुपया कमजोर होने से निवेशकों का रुख गोल्ड की ओर है। विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि मौजूदा रुझान कायम रहे तो आगामी महीनों में सोना ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹1.8 लाख प्रति किलो तक पहुँच सकती है ।
आयात शुल्क और GST नीति का प्रभाव
सरकार फिलहाल सोने पर 15% आयात शुल्क और 3% GST बनाए हुए है। यदि सरकार इन दरों में कमी करती है तो सोने की कीमतों में सीमित गिरावट संभव है। हालांकि, वैश्विक कारणों से कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है ।
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निष्कर्ष
भारत में सोने की मौजूदा तेज़ी महज़ बाजार की घटना नहीं, बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था, सरकारी नीतियों और भू-राजनीतिक हालात का सम्मिलित परिणाम है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोना अब “मुद्रास्फीति के दर्पण” के रूप में काम कर रहा है — जहाँ इसकी ऊँचाई, आम जनता की क्रयशक्ति और महँगाई दोनों का प्रतिबिंब है ।
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