- गश्त के दौरान इंस्पेक्टर विक्रम सिंह की नजर बच्ची पर पड़ी, तुरंत सुरक्षा में लिया
- पेंटिंग में योगी जी का चित्र बनाकर लाई थी अपनी भावनाएं व्यक्त करने
- बच्ची का इलाज मेदांता में कराने और लखनऊ में आवास की व्यवस्था के निर्देश
- मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा—बच्ची की जिंदगी हमारी जिम्मेदारी
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लखनऊ—कहते हैं कि पुलिस सिर्फ कानून नहीं, इंसानियत भी निभाती है। इसका जीवंत उदाहरण उस वक़्त देखने को मिला जब मूकबाधिर बच्ची खुशी की जिंदगी बदल गई—और वह भी इसलिए क्योंकि एक पुलिस अधिकारी ने उसे सिर्फ एक बच्ची नहीं, एक “जिम्मेदारी” समझा।
तीन दिन पहले यह बच्ची कानपुर से अकेले लखनऊ निकल पड़ी थी। उसका उद्देश्य बड़ा था—मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलना। उसके हाथ में एक कागज था, जिस पर उसने अपनी कला और भावनाओं से योगी जी का चित्र बना रखा था।
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लेकिन बच्ची के साथ कोई नहीं था…
ना बोल सकती थी… ना सुन सकती थी…
और लखनऊ की रात में अकेली भटक रही थी।
गश्त के दौरान इंस्पेक्टर विक्रम सिंह की नजर पड़ी—यहीं से बदल गई कहानी
बीती रात हजरतगंज थाना प्रभारी विक्रम सिंह गश्त पर थे। उनकी नजर जैसे ही इस मासूम बच्ची पर पड़ी, वे तुरंत उसके पास पहुंचे।
बात करने की कोशिश की, पर बच्ची मूकबाधिर थी।
डरी हुई… अकेली… लाचार…
महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इंस्पेक्टर बच्ची को अपने साथ थाने लेकर आए।
ट्रांसलेटर बुलाया गया—इशारों की भाषा से खुली कहानी
थाने में इंस्पेक्टर ने तुरंत एक ट्रांसलेटर की व्यवस्था की, जो संकेत भाषा (sign language) समझता था।
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इशारों और हाथों की हरकतों के माध्यम से जो कहानी सामने आई उसने सभी को हैरान कर दिया—
- बच्ची का नाम खुशी है
- वह कानपुर की रहने वाली है
- उसने खुद योगी आदित्यनाथ जी की एक सुंदर पेंटिंग बनाई है
- और वह उनसे मिलने के लिए अकेले लखनऊ आई थी
मासूम किसी का सहारा नहीं चाहती थी… बस अपने “महाराज जी” से मिलना चाहती थी।
इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने दिल जीता—“मुझे एक दिन का समय दो बेटा…”
इंस्पेक्टर ने इशारों में बच्ची को भरोसा दिया:
“बेटा, मुझे बस कल तक का समय दो… मैं तुम्हें मुख्यमंत्री जी से मिलवाऊंगा।”
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यह सिर्फ आश्वासन नहीं—एक वादा था।
और इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने ये वादा निभाकर दिखाया।
आज खुशी मिली मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से—जिंदगी बदल दी
इंस्पेक्टर विक्रम सिंह के अथक प्रयासों से आज बच्ची की मुलाकात माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कराई गई।
मुख्यमंत्री ने बच्ची की पेंटिंग देखी, उसे आशीर्वाद दिया और उसकी पूरी कहानी सुनवाई के माध्यम से समझी।
खुशी की मासूमियत से प्रभावित होकर योगी जी तुरंत हरकत में आए—
- मुख्यमंत्री ने अपने सचिव को आदेश दिया
“बच्ची के रहने की व्यवस्था लखनऊ में तुरंत की जाए।” - बच्ची का इलाज मेदांता हॉस्पिटल लखनऊ में कराने के निर्देश दिए
- और सबसे भावुक कर देने वाली बात कही:
“मैं इस बच्ची की आवाज सुनना चाहता हूं…
अगर इलाज पर करोड़ों रुपए भी लगें, सरकार लगाएगी। बच्चे की जिंदगी से बड़ा कुछ नहीं।”
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मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता ने बच्ची के जीवन में नई उम्मीद भर दी।
खुशी की मुस्कान दोगुनी—इंस्पेक्टर विक्रम बने असली हीरो
अगर इस कहानी में कोई नायक है, तो वो हैं—
हजरतगंज इंस्पेक्टर विक्रम सिंह
- जिन्होंने बच्ची को सड़कों से उठाया,
- उसे सुरक्षा दी,
- उसकी भाषा समझने की कोशिश की,
- उसके सपने को थामा,
- और उसे मुख्यमंत्री तक पहुंचाया।
आज खुशी मुस्कुरा रही है…
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और उसकी वह मुस्कान इंसानियत की जीत है।




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