बस स्टेशन बना बाइक स्टैंड! UPSRTC कमता बस स्टेशन पर अवैध पार्किंग से यात्री बेहाल

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  • चौकी इंचार्ज की शह पर बस स्टेशन बना पार्किंग अड्डा, नियमों की उड़ रहीं धज्जियाँ

तबरेज़ आलम | वरिष्ठ संपादक
लखनऊराजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (UPSRTC) की लापरवाही और स्थानीय पुलिस की कथित मिलीभगत का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कमता बस स्टेशन परिसर में नियमों को ताक पर रखकर अवैध दो-पहिया वाहन स्टैंड संचालित किया जा रहा है, और आरोप है कि यह सब कमता चौकी इंचार्ज की खुली मेहरबानी से हो रहा है।

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बस स्टेशन का मुख्य प्रवेश मार्ग और परिसर निजी दो-पहिया वाहनों से पटा पड़ा है, जबकि परिवहन निगम के स्पष्ट नियम कहते हैं कि बस स्टेशन परिसर में किसी भी प्रकार की निजी पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद अवैध रूप से बाइकें खड़ी करवाई जा रही हैं—वह भी यात्रियों की आंखों के सामने।

चोरी का खतरा, फिर भी अवैध पार्किंग जारी

स्थानीय दुकानदारों और रोज़ाना सफर करने वाले यात्रियों का कहना है कि बस स्टेशन के आसपास पहले ही कई दो-पहिया वाहन चोरी हो चुके हैं। इसके बाद भी बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के दर्जनों बाइकें रोज़ाना यहां खड़ी करवाई जा रही हैं।

लोगों का सीधा सवाल है
अगर बस स्टेशन परिसर में खड़ी किसी बाइक की चोरी हो जाती है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? पुलिस की, परिवहन निगम की या अवैध स्टैंड चलाने वालों की?

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हादसे को दावत दे रही अवैध पार्किंग

अवैध रूप से खड़े दो-पहिया वाहन:
• यात्रियों के आवागमन में भारी बाधा बन रहे हैं
• बसों के प्रवेश और निकास में रुकावट पैदा कर रहे हैं
• और किसी बड़े हादसे को खुला न्योता दे रहे हैं

इसके बावजूद न परिवहन निगम की ओर से कोई सख्त कार्रवाई दिख रही है और न ही स्थानीय पुलिस की तरफ से।

बिना अनुमति, बिना टेंडर, फिर भी बेखौफ संचालन

आरोप है कि यह अवैध दो-पहिया वाहन स्टैंड:
• बिना किसी लिखित अनुमति
• बिना टेंडर
• और बिना किसी अधिकृत आदेश
चलाया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस का संरक्षण न होता, तो यह अवैध स्टैंड एक दिन भी नहीं चल सकता था। कई बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक मिलीभगत की आशंका को और गहरा करता है।

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अब सवाल बड़ा है
• क्या उत्तर प्रदेश परिवहन निगम और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे?
• या फिर किसी बड़ी चोरी या गंभीर हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी?

फिलहाल प्रशासन की चुप्पी ही सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है—
जो किसी बड़े खतरे की ओर साफ इशारा कर रही है।

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