बलूचिस्तान में पाकिस्तान का सीमित नियंत्रण, क्वेटा तक सिमटी हुकूमत: मौलाना मंज़ूर मेंगल का दावा

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  • खुज़दार तक सड़क मार्ग से नहीं जा पा रहे मुख्यमंत्री
  • क्वेटा के बाहर प्रशासनिक पकड़ खत्म होने का आरोप

न्यूज़ डेस्क 

कराचीं:-बलूचिस्तान को लेकर एक बार फिर पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बलूच नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मौलाना मंज़ूर मेंगल ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान सरकार का वास्तविक नियंत्रण बेहद सीमित रह गया है। हालात ऐसे हैं कि राज्य के मुख्यमंत्री तक खुज़दार जैसे अहम ज़िले में बिना हेलीकॉप्टर यात्रा नहीं कर सकते।

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मौलाना मंज़ूर मेंगल के अनुसार, ज़मीनी हकीकत यह है कि पाकिस्तान की सत्ता और प्रशासनिक पकड़ अब सिर्फ क्वेटा शहर के कुछ हिस्सों तक सिमट कर रह गई है। प्रांत के बड़े भूभाग में सरकार की न तो प्रभावी मौजूदगी है और न ही सुरक्षा एजेंसियों का स्थायी नियंत्रण।

सुरक्षा नहीं, डर के साए में प्रशासन”

मौलाना का कहना है कि बलूचिस्तान में आम नागरिकों के साथ-साथ सरकारी अधिकारियों में भी असुरक्षा की भावना चरम पर है। सड़क मार्गों पर सफर करना जोखिम भरा हो गया है, जिसके चलते शीर्ष अधिकारी भी हवाई यात्रा पर निर्भर हैं। उन्होंने दावा किया कि कई इलाकों में सरकारी आदेशों का कोई असर नहीं है और स्थानीय स्तर पर प्रशासन लगभग ठप है।

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क्वेटा के बाहर कमजोर होती पकड़

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि क्वेटा से बाहर निकलते ही सरकार की पकड़ ढीली पड़ जाती है। दूर-दराज़ के ज़िलों में न तो विकास कार्य दिखाई देते हैं और न ही शासन-प्रशासन की प्रभावी मौजूदगी। इससे यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान का “वास्तविक नियंत्रण” काग़ज़ों तक सीमित रह गया है।

बढ़ती बेचैनी और राजनीतिक दबाव

मौलाना मंज़ूर मेंगल के इस बयान को बलूचिस्तान में लंबे समय से चल रहे असंतोष, अलगाववादी भावनाओं और सुरक्षा चुनौतियों से जोड़कर देखा जा रहा है। उनका कहना है कि जब तक बलूच जनता की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मांगों को गंभीरता से नहीं सुना जाएगा, तब तक हालात और बिगड़ते जाएंगे।

पाकिस्तान सरकार पर सवाल

इस दावे के बाद पाकिस्तान सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अगर प्रांत के मुख्यमंत्री ही सुरक्षित रूप से ज़मीनी यात्रा नहीं कर पा रहे हैं, तो यह राज्य की संप्रभुता और प्रशासनिक क्षमता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।

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मौलाना मंज़ूर मेंगल का यह बयान न सिर्फ बलूचिस्तान की जमीनी सच्चाई को उजागर करने का दावा करता है, बल्कि पाकिस्तान के सामने एक गंभीर राजनीतिक और सुरक्षा चुनौती की तस्वीर भी पेश करता है।

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