- हर हफ्ते वादे, सड़क पर वही हालात
- स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम अब भी सपना
- सड़क हादसे बढ़े – आँकड़े कर रहे सवाल
- स्कूल वैन और बसें निकलीं अनफ़िट
- राजस्व में बढ़ोतरी, सुधार गायब
- ‘जल्द सुधार’ का जुमला फिर दोहराया गया
लखनऊ: मीटिंग में बड़े ऐलान, लेकिन सड़क पर हालात जस के तस
हर हफ्ते नया वादा, वही पुराना गीत
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और आयुक्त किंजल सिंह की मुलाकात में फिर से वही दोहराया गया—“विभाग को स्मार्ट बनाया जाएगा, जल्द सुधार होंगे।”
लेकिन जनता पूछ रही है — कब तक “जल्द” शब्द पर भरोसा करे?
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स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम का सपना
ऑनलाइन सेवाएँ, कागजी झंझट खत्म करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म की घोषणा दोहराई गई।
मगर हकीकत यह है कि परिवहन दफ्तरों में अब भी फाइलों का अंबार लगा है और जनता घंटों चक्कर काटने पर मजबूर है।
सड़क सुरक्षा: आंकड़े ही कहानी कहते हैं
•2024 में यूपी में 46,052 सड़क हादसे, जिनमें 24,118 मौतें और 34,665 घायल।
•2023 की तुलना में हादसे 3.4% और मौतें 2% ज्यादा।
•लखनऊ में हादसे 11.6% बढ़े, 1,460 से बढ़कर 1,630।
•मौतों का आंकड़ा भी 568 से बढ़कर 576 तक पहुँचा।
सवाल उठता है—जब हादसे लगातार बढ़ रहे हैं तो “सुरक्षा सुधार” का वादा कितना कारगर है?
फिटनेस और परमिट की पोल
जांच में पाया गया कि हर 9 स्कूल वैन/बस में से एक सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करती है।
लखनऊ में सबसे ज्यादा अनफ़िट वाहन पकड़े गए, जिनके पास या तो फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं थे या परमिट खत्म हो चुके थे।
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राजस्व बढ़ा, सुधार नहीं
विभाग ने 2025 की शुरुआत में 13% से ज्यादा राजस्व वृद्धि दर्ज की है।
यानि पैसे की आमदनी बढ़ी, लेकिन जनता की परेशानी जस की तस।
निष्कर्ष: “जल्द सुधार होंगे” – वही पुराना जुमला
मीटिंग के अंत में फिर वही वादा — “जल्द कदम उठाए जाएंगे।”
लेकिन यह “जल्द” पिछले कई सालों से कभी हकीकत नहीं बन पाया।
आखिरी सवाल:
क्या परिवहन विभाग वाकई कभी स्मार्ट बनेगा,
या फिर अगले महीने फिर से वही वादों की बैठक होगी?
Author: nationstationnews
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