- लखनऊ में फर्जी डिग्री–मार्कशीट गिरोह का बड़ा खुलासा
- PHD होल्डर निकला गैंग का सरगना, हाईटेक तरीके से करता था फर्जीवाड़ा
- गोमतीनगर में होती थी नकली डिग्रियों की प्रिंटिंग
- 25 हजार से 4 लाख तक बिकती थीं फर्जी डिग्रियां
- 25 बड़े विश्वविद्यालयों की हूबहू नकल तैयार करता था गिरोह
न्यूज़ डेस्क
लखनऊ:राजधानी लखनऊ में पुलिस ने फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले एक बड़े और संगठित गिरोह का खुलासा किया है। हैरानी की बात यह है कि इस गिरोह का सरगना खुद PHD डिग्री होल्डर बताया जा रहा है, जो पढ़े-लिखे युवाओं को गुमराह कर नकली शैक्षणिक दस्तावेजों का कारोबार चला रहा था।
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गोमतीनगर से चल रहा था फर्जीवाड़े का नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह गोमतीनगर इलाके में आधुनिक डिजिटल डिजाइनिंग और हाई-क्वालिटी प्रिंटिंग के जरिए देश के नामी विश्वविद्यालयों की डिग्री और मार्कशीट तैयार कर रहा था। ये दस्तावेज इतने असली जैसे होते थे कि आम लोग ही नहीं, बल्कि कई प्राइवेट कंपनियां और संस्थान भी इन्हें पहचान नहीं पाते थे।
डिग्री के हिसाब से तय होती थी कीमत
गिरोह नकली डिग्री और मार्कशीट 25 हजार रुपये से लेकर 4 लाख रुपये तक में बेचता था। डिग्री जितनी बड़ी और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की होती, उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा तय की जाती थी। इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्राइवेट कंपनियों में नौकरी पाने और प्रमोशन हासिल करने के लिए किया जाता था।
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छापेमारी में भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद
पुलिस की छापेमारी के दौरान मौके से
- 923 फर्जी मार्कशीटें
- 15 फर्जी मोहरें
- नीला इंक पैड
- 65 खाली मार्कशीट पेपर
- 6 लैपटॉप
- करीब 2 लाख रुपये नकद
बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि इन उपकरणों की मदद से गिरोह देश भर के करीब 25 बड़े विश्वविद्यालयों की नकली डिग्री और मार्कशीट तैयार कर रहा था।
पूरे देश में फैला था नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के कई राज्यों में इसके ग्राहक फैले हुए थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितने लोगों ने इन फर्जी डिग्रियों के आधार पर नौकरी हासिल की है।
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पुलिस करेगी गहन जांच
पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत कई आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। साथ ही बरामद लैपटॉप और डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क, ग्राहकों और संभावित फर्जी नियुक्तियों का खुलासा किया जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था और रोजगार प्रणाली में सेंध लगाने वाले गिरोहों के खिलाफ एक बड़ा कदम है और आगे भी ऐसे फर्जीवाड़े के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।




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