- रेलवे भूमि पर अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम, दुकानदारों ने किया कड़ा विरोध
- चार घंटे चला हाई-वोल्टेज ड्रामा, स्टेशन रोड पर तनावपूर्ण माहौल
- 85 दुकानदारों को मिला था नोटिस, 39 ने खाली की दुकानें
- बुलडोजर और आरपीएफ के साथ पहुंचा अमला, तीन दुकानें की गईं सील
न्यूज़ डेस्क
मुरादाबाद।रेलवे की जमीन पर बने अतिक्रमण को हटाने पहुंचे रेलवे प्रशासन और दुकानदारों के बीच सोमवार को करीब चार घंटे तक तीखी खींचतान चली। दिल्ली बस अड्डे के सामने स्टेशन रोड पर चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। विरोध के बीच रेलवे ने तीन दुकानों को सील कर कब्जे में ले लिया, जबकि आगे की कार्रवाई फिलहाल रोक दी गई है।
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रेलवे प्रशासन के अनुसार, स्टेशन रोड और दिल्ली बस अड्डे के सामने रेलवे की जमीन पर वर्षों से अवैध रूप से दुकानें संचालित की जा रही थीं। इसको लेकर पहले ही 85 दुकानदारों को नोटिस जारी कर जमीन खाली करने की चेतावनी दी गई थी। रेलवे का दावा है कि नोटिस के बाद अब तक 39 दुकानदार स्वेच्छा से अपनी दुकानें खाली कर चुके हैं।
बुलडोजर के साथ पहुंची टीम, भड़के व्यापारी
सोमवार को नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद रेलवे की इंजीनियरिंग टीम, आरपीएफ और प्रशासनिक अमला बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंचा और दुकानों को सील कर कब्जा लेने की कार्रवाई शुरू कर दी। जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, बड़ी संख्या में दुकानदार और व्यापारी मौके पर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
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व्यापारियों का कहना था कि जब तक उन्हें वैकल्पिक स्थान पर दुकानें आवंटित नहीं की जातीं, तब तक किसी भी तरह की कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। देखते ही देखते विरोध तेज हो गया और स्टेशन रोड पर यातायात भी प्रभावित होने लगा।
विधायक के हस्तक्षेप से रुकी कार्रवाई
स्थिति बिगड़ती देख भाजपा के नगर विधायक रितेश गुप्ता मौके पर पहुंचे और रेलवे अधिकारियों व प्रशासनिक टीम से बातचीत की। विधायक के हस्तक्षेप के बाद कुछ समय के लिए सील लगाने और आगे की कार्रवाई रोक दी गई। हालांकि इससे पहले रेलवे द्वारा तीन दुकानों को सील किए जाने की पुष्टि की जा रही है।
कोर्ट में विचाराधीन होने का दावा
दुकानदारों ने रेलवे की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। व्यापारियों ने कोर्ट केस से जुड़े पर्चे और बैनर दुकानों के बाहर लगा दिए, जिनमें रेलवे से अपील की गई कि न्यायालय का फैसला आने तक कोई कार्रवाई न की जाए।
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दिनभर मौके पर भारी संख्या में व्यापारी डटे रहे और रेलवे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। पुलिस और आरपीएफ बल भी तैनात रहा ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।
रेलवे का पक्ष
रेलवे प्रशासन का कहना है कि जमीन रेलवे की है और अतिक्रमण हटाना अनिवार्य है। अधिकारियों के मुताबिक आगे की कार्रवाई उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद की जाएगी। फिलहाल हालात को देखते हुए अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के चलते स्टेशन रोड क्षेत्र में दिनभर तनावपूर्ण माहौल बना रहा और स्थानीय लोगों में भी असमंजस की स्थिति रही।




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