मां की लाश फ्रीजर में रखने को बोले बेटे, बेटियों ने कराया अंतिम संस्कार

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  • गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना: बेटों ने मां का शव घर लाने से किया इनकार, पिता बना असमंजस में

गोरखपुर:उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मां की मौत के बाद परिवार के बेटों ने ऐसा व्यवहार किया कि हर कोई हैरान रह गया। मृतका के पति और बेटियों ने जिस दर्द का सामना किया, उसने पूरे गांव को व्यथित कर दिया है।

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क्या है पूरा मामला?

गोरखपुर के एक गांव में रहने वाली बुजुर्ग महिला की तबीयत खराब थी और कुछ दिनों पहले उनका निधन हो गया। जब वृद्धाश्रम में यह खबर पहुंची तो कर्मचारी पूरे सम्मान के साथ महिला का शव लेकर गांव पहुंचे ताकि उनका अंतिम संस्कार परंपरा के अनुसार हो सके।

लेकिन घर पहुंचते ही एक चौंकाने वाली स्थिति पैदा हो गई—महिला के बेटों ने मां का शव घर में लाने से साफ इनकार कर दिया।

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शादी है घर में… फ्रीजर में रखवा दीजिए” – बेटों की बेरुखी

जब वृद्धाश्रम के कर्मचारियों ने मृतका का शव घर लाने की कोशिश की, तो बेटों ने कहा—

“घर में शादी है, माहौल खराब हो जाएगा… शव को फ्रीजर में रखवा दीजिए। चार दिन बाद दाह संस्कार कर देंगे।”

यह सुनकर पति और गांव वाले स्तब्ध रह गए। एक मां जिसने पूरे जीवन अपने बच्चों के लिए सबकुछ कुर्बान किया, वही बेटे अंतिम समय में साथ देने तक को तैयार नहीं थे।

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बेटियों ने निभाया फर्ज, ग्रामीण भी आगे आए

बेटों के इनकार के बाद महिला की बेटियां आगे आईं। उन्होंने वृद्धाश्रम के कर्मचारियों से अनुरोध किया कि कम से कम मां के शव को उचित स्थान तक पहुंचा दिया जाए।

ग्रामीणों ने भी मानवता दिखाई और शव को गांव के राजघाट किनारे ले जाकर अस्थायी रूप से मिट्टी में दफना दिया, ताकि शव को कोई नुकसान न पहुंचे।

पति की पीड़ा: “चार दिन बाद कैसे होगा दाह संस्कार?”

मृतका के पति पूरी तरह टूट चुके हैं।

उनका कहना है कि—

बेटों ने इनकार कर दिया, बेटियों ने आगे बढ़कर निभाया… लेकिन अब मैं समझ नहीं पा रहा कि चार दिन बाद शव की स्थिति क्या होगी? दाह संस्कार कैसे हो पाएगा?”

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वे इस उहापोह में हैं कि परंपरा और धार्मिक रीति के तहत पत्नी का अंतिम संस्कार ठीक तरह से किया जाना चाहिए, लेकिन परिस्थितियों के चलते वे खुद भी विवश महसूस कर रहे हैं।

गांव में आक्रोश—लोगों ने बेटों के व्यवहार को बताया अमानवीय

गांव में इस घटना को लेकर आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों का कहना है कि:

  • मां के शव को घर में न आने देना अमानवीय है।
  • शादी के नाम पर संस्कारों और रिश्तों को ठुकराना गलत है।
  • बेटियों ने मां के प्रति सही फर्ज निभाया है।

कुछ ग्रामीण इस मामले की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाने की भी बात कर रहे हैं ताकि स्थिति का समाधान निकाला जा सके।

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यह घटना उन सामाजिक मूल्यों पर भी सवाल खड़ा करती है, जिनमें मां को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है।

यह स्पष्ट है कि

  • जहां बेटों ने अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया,
  • वहीं बेटियों और ग्रामीणों ने मृतका को सम्मान देने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

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