- जाँच के दौरान बने संबंध, कार में हुई बहस के बाद रॉड से हमला — आरोपी दारोगा गिरफ्तार
महोबा।उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक महिला की हत्या के मामले में जाँच अधिकारी दारोगा ही आरोपी बन गया। मामला महोबा निवासी किरन सिंह की हत्या का है, जिनकी शादी एक CRPF जवान से हुई थी। शादी के बाद उत्पन्न विवादों के कारण किरन ने अपने पति पर दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था।
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इस मामले की जाँच 2023 बैच के दारोगा अंकित को सौंपी गई थी। लेकिन जांच के दौरान जो हुआ, उसने पूरे पुलिस विभाग को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया।
जाँच के दौरान नजदीकियाँ बढ़ीं — रिश्ता आरोप–जवाब से आगे दोस्ती तक पहुँचा
सूत्रों और प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दहेज उत्पीड़न केस की जाँच करते समय किरन सिंह और दारोगा अंकित के बीच नजदीकियाँ बढ़ने लगीं।
बीच-बीच में दोनों की मुलाकातें भी होने लगीं, जबकि नियमों के मुताबिक जाँच अधिकारी को पीड़िता से व्यक्तिगत स्तर पर किसी भी प्रकार के अनौपचारिक संपर्क से बचना चाहिए।
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यह ढील आगे चलकर एक गंभीर अपराध की वजह बन गई।
12 नवंबर: कार में घूमने निकले, रास्ते में विवाद — फिर हत्या
घटना 12 नवंबर की है, जब दोनों एक साथ कार में घूमने निकले थे।
यात्रा के दौरान किसी बात को लेकर दोनों में तेज बहस हो गई।
बहस इतनी बढ़ गई कि गुस्से में आकर दारोगा अंकित ने कार में रखी रॉड से किरन सिंह पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद दारोगा मौके से भागने की कोशिश में था, लेकिन पुलिस ने कुछ ही समय में उसे गिरफ्तार कर लिया।
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आरोपी दारोगा गिरफ्तार — गंभीर धाराओं में केस दर्ज
पुलिस द्वारा आरोपी दारोगा को गिरफ्तार कर लिया गया है, और उसके खिलाफ:
- हत्या (302 IPC)
- सबूत नष्ट करने का प्रयास (201 IPC)
- विभागीय आचार संहिता उल्लंघन
जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
मामले की आगे SIT द्वारा विस्तृत जांच कराए जाने की संभावना है।
जाँच अधिकारियों और पीड़ित महिलाओं के बीच ‘अनुचित समीपता’ पर उठे सवाल
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यह आरोप नया नहीं है। विभिन्न राज्यों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ जाँच के दौरान:
- पीड़िता और जाँच अधिकारी में अनौपचारिक संबंध बने,
- भावनात्मक निर्भरता बन गई,
- या जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठे।
पुलिस मैनुअल में स्पष्ट प्रावधान है कि जाँच अधिकारी पीड़िता से केवल आधिकारिक दायरे में ही बातचीत करे, लेकिन कई बार इन नियमों का उल्लंघन होता रहा है।
यह घटना उन सभी प्रक्रियाओं की गंभीरता को दिखाती है जिनमें लापरवाही आगे चलकर अपराध का रूप ले सकती है।
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परिवार और समाज में गुस्सा — महिला सुरक्षा पर फिर उठे प्रश्न
किरन सिंह की मौत ने पूरे इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि:
- यदि जांच अधिकारी पर निगरानी होती,
- और पुलिस विभाग की शिथिलता न होती,
तो यह वारदात रोकी जा सकती थी।
क्या होगा आगे?
- पुलिस विभाग आरोपी दारोगा को निलंबित कर विभागीय जांच करेगा।
- SIT या उच्चस्तरीय जांच टीम गठित हो सकती है।
- कोर्ट में मामला तेज़ी से चलेगा।
- पुलिस विभाग में जाँच प्रक्रिया से जुड़े प्रोटोकॉल की समीक्षा भी हो सकती है।
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