- पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के सीसीटीवी कैमरों का दुरुपयोग—3 कर्मचारी गिरफ्तार, महिलाओं की जासूसी व ब्लैकमेलिंग का आरोप
सुल्तानपुर: पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के नाम पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों का घोर दुरुपयोग सामने आया है। हलियापुर टोल प्लाजा से जुड़े इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए टोल प्लाजा के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक कुँवर अनुपम सिंह के निर्देशन पर की गई, जोकि चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है।
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कैसे हुआ खुलासा?
सूत्रों के अनुसार, टोल प्लाजा पर तैनात तकनीकी कर्मचारियों द्वारा सीसीटीवी फुटेज का नाजायज इस्तेमाल किए जाने की जानकारी पुलिस को मिली थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी कैमरों के जरिए आसपास की महिलाओं की गतिविधियों पर नजर रखते थे। यही नहीं, वे हाईवे से गुजरने वाले कई वाहन चालकों और लोगों की निजता भंग कर उनकी वीडियो क्लिप्स का दुरुपयोग भी कर रहे थे।
छापेमारी में तीन आरोपी दबोचे
थानाध्यक्ष तरुण पटेल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापेमारी कर तीन कर्मचारियों–
- आशुतोष सरकार
- अभिषेक तिवारी
- प्रमोद कुमार पटेल
को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से ₹5000 की नकदी, मोबाइल फोन और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। पुलिस के मुताबिक यह रकम वसूली और ब्लैकमेलिंग के जरिए हासिल की गई बताई जा रही है।
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आरोप क्या हैं?
जांच में यह सामने आया कि तीनों आरोपी तकनीकी पदों पर रहते हुए एक्सप्रेसवे के सीसीटीवी कैमरों का दुरुपयोग कर—
- महिलाओं की जासूसी
- वाहन चालकों की निजी गतिविधियों की निगरानी
- वीडियो क्लिप्स सहेज कर ब्लैकमेलिंग
- अवैध वसूली
जैसी गंभीर हरकतों में शामिल थे। यह पूरा कृत्य न सिर्फ निजता का खुला उल्लंघन है, बल्कि हाईवे सुरक्षा व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा करता है।
पुलिस टीम
कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम—
- उपनिरीक्षक रफ्फन खाँ
- हेड कांस्टेबल बृजेन्द्र पाल सिंह
- कांस्टेबल शीलू राठौर
- कांस्टेबल अनूप कुमार
ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
न्यायालय भेजे गए आरोपी
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी कर उन्हें न्यायालय भेज दिया है। आगे के लिए तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज का बैकअप और सर्विलांस रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
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सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि जब सुरक्षा की जिम्मेदारी इसी सिस्टम पर है, तो उसके कर्मचारियों द्वारा इस तरह के दुरुपयोग को कैसे रोका जाएगा?
प्रदेश सरकार और एक्सप्रेसवे प्राधिकरण से भी अब जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।यह मामला एक गंभीर चेतावनी है कि तकनीकी व्यवस्था का दुरुपयोग किस तरह जनता की निजता और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
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