नई दिल्ली: “भारत को सज़ा नहीं देना चाहते, बल्कि साझेदारी बढ़ाना चाहते हैं” – अमेरिकी ऊर्जा मंत्री

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  1. “ट्रंप का सबसे बड़ा जुनून विश्व शांति है, भारत हमारे लिए अहम सहयोगी: US Minister”
  2. “भारत को विकल्प देना चाहते हैं, रूसी तेल पर निर्भर न रहे: अमेरिकी ऊर्जा मंत्री”
  3. “भारत–अमेरिका ऊर्जा सहयोग पर बड़ा बयान, ‘हम प्यार करते हैं भारत से’ – क्रिस राइट”

न्यूज़ डेस्क 
नई दिल्ली। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि वाशिंगटन भारत को रूसी तेल खरीदने पर दंडित करने के मूड में नहीं है। बल्कि उनका कहना है कि अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा सहयोग का दायरा और गहरा करना चाहता है। इसमें प्राकृतिक गैस, कोयला, परमाणु ऊर्जा से लेकर स्वच्छ ईंधन तक सब शामिल है।

मैं भारत का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं”

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न्यूयॉर्क फॉरेन प्रेस सेंटर में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राइट ने कहा,

“जबसे मैंने यह पद संभाला है, तब से मेरा अधिकांश समय भारत के साथ काम करने में बीता है। भारत न सिर्फ दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, बल्कि अमेरिका का एक शानदार सहयोगी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भी है। यहां ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है क्योंकि लोग अपनी समृद्धि और अवसरों का विस्तार कर रहे हैं। मैं भारत का बहुत बड़ा फैन हूं। हम भारत से प्यार करते हैं और उसके साथ और ज्यादा ऊर्जा व्यापार तथा बातचीत की उम्मीद रखते हैं।”

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यह बयान तब आया है जब भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा था कि आने वाले वर्षों में भारत अमेरिका के साथ ऊर्जा व्यापार को कई गुना बढ़ाना चाहता है और यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा होगा।

ट्रंप का सबसे बड़ा जुनून विश्व शांति है”

राइट से जब पूछा गया कि भारत की रूस से तेल खरीद और उस पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ को लेकर उनकी राय क्या है, तो उन्होंने कहा –

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सबसे बड़ा जुनून विश्व शांति है। हमारा मकसद किसी को सज़ा देना नहीं, बल्कि युद्ध को खत्म करना है।”

भारत को विकल्प देने की कोशिश

राइट ने साफ कहा कि अमेरिका भारत के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके साथ खड़ा है।

“हम भारत को सज़ा नहीं देना चाहते। हम सिर्फ यही चाहते हैं कि भारत रूसी तेल पर निर्भर न रहे, क्योंकि बाजार में ढेरों अन्य विकल्प मौजूद हैं। रूस को तेल छूट पर बेचना पड़ता है, और भारत इसे सस्ता होने की वजह से खरीदता है। लेकिन अमेरिका और बाकी देशों के पास भी तेल है। हम चाहते हैं कि भारत हमारे साथ मिलकर तेल खरीदे और ऊर्जा साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाए।”

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