धर्म बदलकर मुस्लिम-ईसाई बनने वालों का खत्म होगा SC/ST दर्जा

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  • इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
  • महाराजगंज से उठे मामले पर हाईकोर्ट ने दिया बड़ा निर्णय, अब प्रदेशभर में होगी जांच

न्यूज़ डेस्क
लखनऊ/प्रयागराज:
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले से शुरू हुआ मामला अब पूरे प्रदेश में हलचल मचा चुका है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने साफ़-साफ़ कहा है कि हिंदू धर्म छोड़कर मुस्लिम या ईसाई धर्म अपनाने वाले किसी भी व्यक्ति को अनुसूचित जाति-जनजाति का दर्जा नहीं मिल सकता। ऐसा व्यक्ति SC/ST के लिए निर्धारित किसी भी सरकारी योजना, संरक्षण या लाभ का पात्र नहीं रहेगा।

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मामले की पृष्ठभूमि

महाराजगंज में एक याचिका दाखिल हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ लोग हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई/मुस्लिम बन चुके हैं, लेकिन फिर भी SC/ST की योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। हलफनामों में धर्म बदलने की बात छिपाई गई थी और लाभ लेने की कोशिश जारी थी। मामला अदालत तक पहुंचा, और अब यह मुद्दा पूरे राज्य में बड़ा कानूनी और प्रशासनिक सवाल बन चुका है।

कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

माननीय न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा—

  • धर्म परिवर्तन के बाद व्यक्ति उन सामाजिक परिस्थितियों में नहीं रहता, जिनके आधार पर SC/ST का दर्जा दिया जाता है।
  • ईसाई और इस्लाम धर्म में जाति व्यवस्था मान्य नहीं है, इसलिए ऐसे धर्म अपनाने वालों को जातिगत सुरक्षा और आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
  • धर्म परिवर्तन के बाद भी लाभ लेना “संविधान के साथ धोखा” माना जाएगा।
  • ऐसा करना न केवल कानून विरोधी, बल्कि वास्तविक प्रभावित वर्गों के अधिकारों का हनन भी है।

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प्रशासन को सख्त निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी महाराजगंज को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया है।

साथ ही संकेत दिया कि—

  • उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में ऐसे मामलों की जांच की जा सकती है।
  • धर्म परिवर्तन कर SC/ST लाभ लेने वालों को लाभ बंद किया जाएगा।
  • ज़रूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

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सुल्तानपुर, बस्ती, गोरखपुर सहित कई जिलों में बढ़ेगी जांच

सूत्र बताते हैं कि सुल्तानपुर, महराजगंज, बस्ती और संतकबीरनगर जैसे जिलों में हजारों की संख्या में ऐसे लोग चिन्हित हो सकते हैं,जो धर्म परिवर्तन के बावजूद SC/ST प्रमाणपत्र और उससे मिलने वाली योजनाओं का लाभ ले रहे हैं।अदालत के फैसले के बाद अब ऐसे सभी मामलों पर कड़ी निगरानी और जांच की संभावना बढ़ गई है।

फैसले का प्रभाव

  • SC/ST वर्ग के वास्तविक पात्रों तक लाभ पहुँचाने की दिशा में बड़ा कदम
  • धर्म परिवर्तन को लेकर कानूनी स्पष्टता
  • फर्जी प्रमाणपत्र और गलत तरीके से लिए जा रहे लाभों पर बड़ी कार्रवाई संभव
  • प्रदेश में चल रही कई योजनाओं के लाभार्थियों की दोबारा समीक्षा होगी

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निष्कर्ष

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में जातिगत आरक्षण और धर्म परिवर्तन के बीच संबंधों पर नई बहस शुरू करता है।धर्म परिवर्तन कर रहे लोगों के लिए यह स्पष्ट संदेश है अगर आप धर्म बदलते हैं, तो अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए मिलने वाले सभी विशेष अधिकार और लाभ स्वतः समाप्त माने जाएंगे।   

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