- 5 साल की उम्र से शुरू हुआ यौन शोषण, 7 साल तक चलता रहा अपराध
- डर और भावनात्मक दबाव में रखकर बच्ची को चुप रहने पर किया मजबूर
- घरेलू बहानों और डिजिटल माध्यमों का आरोपी ने किया दुरुपयोग
- बच्ची के व्यवहार में बदलाव से मां को हुआ शक, FIR दर्ज
न्यूज़ डेस्क
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सामने आए एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। एक एयरफोर्स कर्मचारी को अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ लगातार सात वर्षों तक यौन शोषण करने का दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। यह फैसला 15 जनवरी 2026 को देहरादून की विशेष अदालत ने सुनाया।
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अदालती अभिलेखों के अनुसार, पीड़िता की उम्र जब केवल 5 वर्ष थी, तभी से आरोपी पिता ने उसके साथ यौन शोषण शुरू कर दिया। आरोपी ने बच्ची को डर और भावनात्मक दबाव में रखकर लंबे समय तक चुप रहने के लिए मजबूर किया। वह उसे यह विश्वास दिलाता था कि यह सब सामान्य है और किसी को बताना गलत होगा।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने घरेलू बहानों और डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर बच्ची के साथ अनुचित हरकतें कीं। कम उम्र और पारिवारिक रिश्ते के भरोसे का फायदा उठाकर आरोपी वर्षों तक अपराध करता रहा।
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बच्ची के व्यवहार में अचानक आए बदलावों के बाद मां को शक हुआ। पूछताछ करने पर सच्चाई सामने आई, जिसके बाद पीड़िता की मां ने 17 नवंबर 2023 को देहरादून में एफआईआर दर्ज कराई। उस समय आरोपी की तैनाती उत्तराखंड में ही थी।
पुलिस जांच के दौरान भौतिक साक्ष्य, मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट के साथ पीड़िता के बयान दर्ज किए गए। इन सबूतों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अदालत में मजबूत केस पेश किया। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
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अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराध समाज के लिए बेहद घातक हैं और ऐसे मामलों में किसी भी तरह की नरमी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। कोर्ट ने पीड़िता के पुनर्वास और मानसिक देखभाल पर भी जोर दिया।
जागरूकता संदेश
यह मामला समाज के लिए एक कड़ी चेतावनी है कि बच्चों के खिलाफ अपराध कई बार घर के भीतर ही छिपे रहते हैं। यदि किसी बच्चे के व्यवहार में डर, चुप्पी या असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो तुरंत सतर्क होकर कार्रवाई करना जरूरी है।




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