- सलमान से तारिक तक पहुंची ‘मौत की सवारी
संवाद सूत्र
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नई दिल्ली:दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके ने देशभर में सनसनी फैला दी। इस हमले को न केवल एक आतंकी वारदात माना जा रहा है, बल्कि इसकी परतें खुलने के साथ-साथ यह साफ़ होता जा रहा है कि साजिश कितनी गहरी और योजनाबद्ध थी। जांच एजेंसियों ने हमले में इस्तेमाल की गई कार की ट्रेसिंग से लेकर आरोपियों की कड़ी तक कई अहम सुराग हासिल किए हैं।
कार से खुली साजिश की परत
हमले में इस्तेमाल की गई हुंडई i20 कार शुरुआत में सलमान नामक व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत थी।
सलमान ने यह कार नदीम नाम के व्यक्ति को बेच दी।
नदीम ने इसे आगे फरीदाबाद के एक सेकंड हैंड कार डीलर को बेच दिया, जिसने आगे जाकर यह कार तारिक नामक व्यक्ति को बेच दी।
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जांच में पता चला कि तारिक मूल रूप से कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला है, लेकिन कुछ समय से फरीदाबाद में रह रहा था। यहीं से उसने इस कार का इस्तेमाल अपने आतंकी मिशन में करने की योजना बनाई।
तारिक का मिशन और विफल प्रयास
तारिक ने पाकिस्तान समर्थित आतंकियों से संपर्क में रहकर भारत की राजधानी में एक बड़ा धमाका करने का षड्यंत्र रचा था।
उसने लाल किले के आसपास भारी भीड़भाड़ वाले इलाके को निशाना बनाने की योजना बनाई।
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सूत्रों के मुताबिक, जब उसके साथियों की गिरफ्तारी शुरू हुई, तो उसे लगा कि उसका मिशन अधूरा रह जाएगा।
अंतिम कोशिश के तौर पर उसने कार को लाल किले के पास स्थित एक मंदिर में घुसाने की योजना बनाई, ताकि अधिक से अधिक नुकसान हो सके।
लेकिन सुरक्षा बढ़ने के कारण वह अपने मकसद में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया। इसके बावजूद, इस कोशिश में कई निर्दोष लोगों की जानें चली गईं।
गिरफ्तार आतंकियों का नेटवर्क
इस हमले से जुड़े तार कश्मीर तक जा रहे हैं। जांच एजेंसियों ने अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है:
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- आरिफ निसार डार
- यासिर-उल-अशरफ
- मकसूद अहमद डार
- मौलवी इरफान अहमद (मस्जिद के इमाम)
- जामीर अहमद अहांगर
- डॉ. मुझम्मिल
- डॉ. अदील
- तारिक (मुख्य आरोपी)
ये सभी आरोपी कश्मीर घाटी के अलग-अलग जिलों से आते हैं। जांच में पता चला है कि सभी किसी न किसी रूप में आतंकी संगठनों से जुड़े हुए थे, और उन्हें पाकिस्तान से फंडिंग और ट्रेनिंग भी मिल रही थी।
पाकिस्तान का कनेक्शन
जांच एजेंसियों ने अब तक के सबूतों के आधार पर कहा है कि इस हमले में पाकिस्तानी हैंडलरों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
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कार में विस्फोटक सामग्री लगाने की तकनीक और टाइमिंग सिस्टम ऐसे थे, जो आमतौर पर सीमापार से प्रशिक्षित आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं।
इसके अलावा, गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया चैट में पाकिस्तान से आने वाले कोडवर्ड संदेश भी मिले हैं।
एजेंसियों की कार्रवाई
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने मिलकर इस केस की जांच शुरू की है।
फरीदाबाद, श्रीनगर और पुलवामा में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की गई।
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फरीदाबाद के कार डीलर को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि उसे खरीदार की पृष्ठभूमि की जानकारी थी या नहीं।
देशभर में अलर्ट
इस वारदात के बाद देशभर में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है।
विशेषकर धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों के आसपास सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं।
निष्कर्ष
लाल किले के पास हुआ यह ब्लास्ट केवल एक आतंकी हमला नहीं, बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा को चुनौती देने का प्रयास था।
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स्थानीय युवाओं को आतंक के जाल में फंसाने की रणनीति एक बार फिर उजागर हुई है।
जांच जारी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह हमला एक सुनियोजित और बहुस्तरीय साजिश का हिस्सा था, जिसमें स्थानीय स्तर पर सक्रिय आतंकी मॉड्यूल और पाकिस्तान से संचालित नेटवर्क दोनों की भूमिका रही।




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