कौन हैं जस्टिस विक्रम नाथ? CJI की कुर्सी की संभावित कतार में नाम, पत्नी भी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की VC

कौन हैं जस्टिस विक्रम नाथ? CJI की कुर्सी की संभावित कतार में नाम, पत्नी भी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की VC
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10 फरवरी 2027 से संभाल सकते हैं भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद, 23 सितंबर 2027 तक रहेगा कार्यकाल

प्रो. संगीता श्रीवास्तव को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दूसरा पांच वर्षीय कार्यकाल, विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार

न्यूज़ डेस्क

प्रयागराज/नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीशों में शामिल जस्टिस विक्रम नाथ एक बार फिर चर्चा में हैं। मौजूदा मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी 2027 को समाप्त होना है और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठता क्रम के अनुसार जस्टिस विक्रम नाथ 10 फरवरी 2027 को अगले CJI के रूप में पदभार संभाल सकते हैं। हालांकि, अंतिम नियुक्ति संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होती है।

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जस्टिस विक्रम नाथ का कार्यकाल CJI के रूप में अपेक्षाकृत छोटा होगा। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार वे 23 सितंबर 2027 को सेवानिवृत्त होंगे।

कौन हैं जस्टिस विक्रम नाथ?

जस्टिस विक्रम नाथ का जन्म 24 सितंबर 1962 को हुआ था। उन्होंने 30 मार्च 1987 को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और इलाहाबाद हाई कोर्ट में 17 साल से अधिक समय तक वकालत की।

24 सितंबर 2004 को उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 27 फरवरी 2006 को वे स्थायी न्यायाधीश बने। करीब 15 वर्ष इलाहाबाद हाई कोर्ट में सेवा देने के बाद उन्हें 10 सितंबर 2019 को गुजरात हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

इसके बाद 31 अगस्त 2021 को वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने।

गुजरात हाई कोर्ट में लाइव स्ट्रीमिंग की शुरुआत

गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस विक्रम नाथ के कार्यकाल की एक प्रमुख पहल अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग रही। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार, वे भारत में किसी हाई कोर्ट के ऐसे पहले मुख्य न्यायाधीश बने, जिन्होंने न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू की।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद उन्होंने न्यायिक प्रशासन से जुड़ी कई जिम्मेदारियां भी संभालीं। वे सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन रहे और मई 2025 से सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के चेयरपर्सन हैं। नवंबर 2025 में उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण यानी NALSA के कार्यकारी अध्यक्ष का पद भी संभाला।

CJI बनने की कतार में क्यों है नाम?

सुप्रीम कोर्ट में CJI की नियुक्ति के लिए सामान्य परंपरा वरिष्ठतम न्यायाधीश को अगला मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने की रही है। मौजूदा क्रम के अनुसार जस्टिस सूर्यकांत के बाद जस्टिस विक्रम नाथ का नाम आता है।

इसी वरिष्ठता क्रम के आधार पर प्रकाशित न्यायिक उत्तराधिकार तालिकाओं में 10 फरवरी 2027 से जस्टिस विक्रम नाथ के CJI बनने की तारीख दी गई है। इसके बाद जस्टिस बी.वी. नागरत्ना का नाम आता है।

पत्नी प्रो. संगीता श्रीवास्तव को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में दूसरा कार्यकाल

जस्टिस विक्रम नाथ के साथ ही उनकी पत्नी प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव भी इन दिनों चर्चा में हैं। उन्हें इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में दूसरे पांच वर्षीय कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त किया गया है।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विश्वविद्यालय की विजिटर के रूप में उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक नया कार्यकाल 16 सितंबर 2026 से प्रभावी माना गया है और यह पांच वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, जारी रहेगा।

यह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार है जब किसी कुलपति को दूसरा कार्यकाल मिला है। प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने नवंबर 2020 में विश्वविद्यालय की कुलपति के रूप में कार्यभार संभाला था और वे विश्वविद्यालय की पहली महिला कुलपति बनी थीं।

एक परिवार में न्यायपालिका और उच्च शिक्षा के दो बड़े पद

जस्टिस विक्रम नाथ का CJI पद तक पहुंचना न्यायिक वरिष्ठता और संवैधानिक नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा विषय है, जबकि प्रो. संगीता श्रीवास्तव की पुनर्नियुक्ति विश्वविद्यालय की निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुई है।

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दोनों घटनाओं का एक ही परिवार से जुड़ना निश्चित रूप से सार्वजनिक चर्चा का विषय बन सकता है। लेकिन केवल पारिवारिक संबंध के आधार पर दोनों नियुक्तियों के बीच किसी प्रभाव, हित-संघर्ष या अनुचित हस्तक्षेप का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिकॉर्ड इन दोनों को अलग-अलग संस्थागत प्रक्रियाओं से जोड़ते हैं।

अब आगे क्या?

अगर मौजूदा वरिष्ठता परंपरा और आधिकारिक सेवानिवृत्ति तिथियों के अनुसार क्रम बना रहता है, तो 10 फरवरी 2027 को जस्टिस विक्रम नाथ भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाल सकते हैं। उनका कार्यकाल 23 सितंबर 2027 तक रहने की संभावना है। इसके बाद वरिष्ठता क्रम में अगला बदलाव होगा।

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