UPSRTC:लेखा प्रभारी की राजस्व लूट, नज़ीबाबाद डिपो में खुला खेल

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  • नज़ीबाबाद डिपो में 7 हरे पेड़ों का अवैध कटान साबित
  • जुर्माना लगा, केस दर्ज… फिर भी परिवहन निगम में संरक्षण कायम
  • बिना अनुमति पेड़ों की कटाई, कुछ बेचे गए तो कुछ घर पहुँचे

नज़ीबाबाद (बिजनौर)।उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के नज़ीबाबाद रोडवेज डिपो में तैनात लेखा प्रभारी राजीव वर्मा पर लगाए गए आरोप अब वन विभाग की जांच रिपोर्ट में सही पाए गए हैं। जांच में स्पष्ट रूप से सामने आया है कि बस स्टेशन परिसर में बिना किसी विभागीय आदेश और अनुमति के 7 हरे-भरे पेड़ों का अवैध कटान कराया गया।

https://nationstationnews.com/latest-news/7250/

वन विभाग की आधिकारिक जांच में खुलासा

क्षेत्रीय वन अधिकारी नज़ीबाबाद द्वारा जारी पत्र संख्या 583/22-1 दिनांक 13 जनवरी 2026 में दर्ज जांच के अनुसार—
 1-21 जुलाई 2025 की शिकायत की जांच

2-25 जुलाई 2025 को वन विभाग व नज़ीबाबाद डिपो प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई

3- बस स्टेशन परिसर में 7 पेड़ों का अवैध पातन (कटान) प्रमाणित

4- कोई वैधानिक अनुमति या स्वीकृति नहीं पाई गई

5-काम के नाम पर पेड़ काटे, लकड़ी का हिसाब नहीं

जांच में यह भी सामने आया कि ग्रेनाइट/फर्श कार्य के नाम पर ठेकेदार के मजदूरों से पेड़ कटवाए गए, लेकिन नियमानुसार प्रक्रिया नहीं अपनाई गई| लकड़ी का लेखा-जोखा नहीं व विभागीय सूचना नहीं दी गई

सूत्रों के मुताबिक, कुछ लकड़ी बेची गई और कुछ निजी तौर पर घर पहुँचाई गई।

https://nationstationnews.com/latest-news/7234/

वन विभाग ने दर्ज किया केस, लगाया जुर्माना

वन विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए—

केस संख्या 53/नजी0/2025-26 दर्ज की एवं उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा 4/10 व 10 एवं उ0प्र0 इमारती लकड़ी व अन्य वन उपज अधिनियम 1978 की धारा 3/28 के तहत कार्रवाई की।साथ ही दोषियों से ₹10,000 का प्रतिकर (जुर्माना) वसूला गया। वन विभाग के नियमों के अंतर्गत ऐसे मामलों में  6 माह का कारावास या ₹1000 तक जुर्माने का प्रावधान भी उल्लेखित है ।

https://nationstationnews.com/latest-news/7215/

परिवहन निगम में सन्नाटा, संरक्षण बरकरार

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वन विभाग की स्पष्ट रिपोर्ट और केस दर्ज होने के बावजूद  परिवहन निगम ने कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की। न लेखा प्रभारी पर कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई ।सूत्रों के मुताबिक़ लेखा प्रभारी कई अधिकारियों का चहेता भी हैं जिसके चलते संरक्षण बरक़रार है ।

न संरक्षण देने वाले अधिकारियों से जवाब तलब

कर्मचारियों का आरोप है कि ऊपर से नीचे तक पूरा सिंडिकेट सक्रिय है, जिसके चलते कार्रवाई फाइलों में दबा दी गई।

सवाल जो अब भी बाकी हैं

जब वन विभाग ने अपराध साबित कर दिया, तो परिवहन निगम अब तक चुप क्यों है?
 क्या लेखा प्रभारी राजीव वर्मा पर विभागीय जांच होगी? या फिर यह मामला भी संरक्षण की भेंट चढ़ जाएगा?नज़ीबाबाद डिपो का यह मामला अब केवल अवैध पेड़ कटान नहीं, बल्कि राजस्व लूट, पर्यावरण अपराध और प्रशासनिक संरक्षण का बड़ा उदाहरण बन चुका है।

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