- कोर्ट मैरिज का खुलासा, मंगेतर को मिला 21 लाख का अनुग्रह अनुदान; पिता बोले— “हकदार हैं, लेकिन अंतिम संस्कार तक साथ रहना चाहिए था”
- शहादत के बाद सामने आई कोर्ट मैरिज की कहानी, मुआवजे से ज्यादा चर्चा रिश्तों और जिम्मेदारियों की हो रही है।
- शहीद एयरफोर्स अफसर की मौत के बाद मुआवजे पर भावनात्मक विवाद, कोर्ट मैरिज का खुलासा
- 21 लाख रुपये की सहायता राशि कानूनी पत्नी को मिली; पिता बोले— बहू हैं, लेकिन अंतिम संस्कार तक परिवार के साथ रहना चाहिए
न्यूज़ डेस्क
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पटना/जोरहाट। असम के जोरहाट में हाल ही में हुए भारतीय वायुसेना विमान हादसे में शहीद हुए फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की मौत के बाद एक भावनात्मक और पारिवारिक विवाद सामने आया है। बिहार सरकार द्वारा शहीद अधिकारी की पत्नी के रूप में श्रेया राय को 21 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।
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जानकारी के अनुसार, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार और श्रेया राय की अगले वर्ष औपचारिक शादी होने वाली थी। हालांकि दोनों ने पहले ही कोर्ट मैरिज कर ली थी, जिसकी जानकारी शुभम के परिवार को नहीं थी। शुभम की शहादत के बाद सरकारी दस्तावेजों में श्रेया को उनकी कानूनी पत्नी माना गया और बिहार सरकार की ओर से 21 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक उन्हें सौंपा गया।
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श्राद्धकर्म से पहले घर लौटने पर उठे सवाल
शुभम के पिता अमरेंद्र शर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि उनके बेटे ने वास्तव में श्रेया से विवाह किया था तो वह उनकी बहू हैं और आर्थिक सहायता पाने की पूरी हकदार भी हैं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि परिवार को उम्मीद थी कि श्रेया अंतिम संस्कार और श्राद्धकर्म की प्रक्रिया पूरी होने तक परिवार के साथ रहतीं।
अमरेंद्र शर्मा ने कहा,
“अगर मेरे बेटे ने श्रेया से शादी की थी तो वह मेरी बहू है और चेक पाने की हकदार भी। लेकिन पत्नी का फर्ज निभाना भी जरूरी था। पति के श्राद्धकर्म से पहले ही वह चेक लेकर अपने घर चली गईं।”
कानूनी रूप से पत्नी होने के कारण मिली सहायता
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सरकारी नियमों के अनुसार मृतक सरकारी कर्मी या सैनिक के मामले में कानूनी रूप से दर्ज पत्नी को प्राथमिक लाभार्थी माना जाता है। कोर्ट मैरिज के दस्तावेज उपलब्ध होने के कारण श्रेया राय को यह सहायता प्रदान की गई।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग श्रेया राय के कानूनी अधिकारों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि शहीद अधिकारी के परिवार की भावनाओं का भी सम्मान किया जाना चाहिए था।
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पांच जवान हुए थे शहीद
गौरतलब है कि असम के जोरहाट में हुए भारतीय वायुसेना के विमान हादसे में कुल पांच जवान शहीद हुए थे। फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार भी उनमें शामिल थे। पूरे सैन्य और नागरिक समुदाय ने उनकी शहादत को श्रद्धांजलि दी है।



