पंचायत सहायकों ने खोला मोर्चा, ईको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरना शुरू

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  • ₹6 हजार से ₹30 हजार मानदेय करने की मांग
  • संविदा खत्म कर स्थायी सेवा नियमावली लागू करने की उठाई आवाज

लखनऊ। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पंचायत सहायकों ने सोमवार से राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पंचायत सहायक लखनऊ पहुंचे और सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।

गांवों में सरकारी योजनाओं और पंचायत कार्यों की महत्वपूर्ण कड़ी

पंचायत सहायकों का काम केवल कार्यालय में बैठकर कागजी कार्यवाही तक सीमित नहीं है। वे ग्राम पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं और ग्रामीणों के बीच महत्वपूर्ण संपर्क कड़ी के रूप में काम करते हैं। पंचायत भवन से जुड़े विभिन्न ऑनलाइन और डिजिटल कार्यों में सहयोग करने के साथ ग्रामीणों को सरकारी सेवाओं और योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने में भी उनकी भूमिका रहती है।

पंचायत सहायकों द्वारा पंचायत स्तर पर परिवार रजिस्टर, जन्म-मृत्यु संबंधी विवरण, सरकारी योजनाओं से जुड़े आवेदन एवं अभिलेखीय कार्यों में सहयोग किया जाता है। इसके अलावा पंचायत भवन में आने वाले ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी सेवाओं की प्रक्रिया समझाने, ऑनलाइन आवेदन एवं डिजिटल सेवाओं में सहायता करने तथा विभागीय पोर्टल पर आवश्यक जानकारी दर्ज कराने जैसे कार्य भी किए जाते हैं।

कई पंचायत सहायकों की जिम्मेदारी पंचायत से संबंधित सूचनाओं को डिजिटल माध्यम से अपडेट कराने और अधिकारियों एवं ग्राम पंचायत के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान में सहयोग करने की भी होती है। यही वजह है कि प्रदर्शनकारी अपने काम और जिम्मेदारियों के अनुपात में मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

₹6 हजार से ₹30 हजार मानदेय करने की मांग

पंचायत सहायकों की प्रमुख मांग है कि वर्तमान ₹6,000 मासिक मानदेय को बढ़ाकर ₹30,000 किया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बढ़ती जिम्मेदारियों और काम के बढ़ते दायरे के बावजूद उन्हें मिलने वाला मानदेय बेहद कम है।

संविदा व्यवस्था खत्म कर स्थायी सेवा नियमावली की मांग

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धरने पर बैठे पंचायत सहायकों ने संविदा व्यवस्था समाप्त कर स्थायी सेवा नियमावली लागू करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि लंबे समय से पंचायत स्तर पर काम करने के बावजूद सेवा की स्थिरता और भविष्य को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं है।

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पंचायत सहायकों ने सरकार से उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। यूनियन की ओर से मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है। अब देखना होगा कि सरकार पंचायत सहायकों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।

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