पेंशन वैलिडेशन व्यवस्था की पुनर्समीक्षा की मांग, 2 से 16 अक्टूबर तक होगा जागरण पखवाड़ा

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  • केवल सॉफ्टवेयर के आधार पर पेंशन रोकने का विरोध, हर कोषागार में हेल्प डेस्क बनाने की मांग

महोबा, 16 सितंबर। वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स सेवा संस्थान, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के पेंशनरों के हितों को लेकर पेंशन वैलिडेशन व्यवस्था तथा कोषागार निदेशालय द्वारा तैयार “कोषागारों में पेंशन प्रबंधन हेतु SOP” की शासन स्तर पर पुनर्समीक्षा कराने की मांग की है। संस्थान के महामंत्री बी.के. तिवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पेंशन भुगतान व्यवस्था को सरल एवं पेंशनर हितैषी बनाने की मांग उठाई है।

संस्थान ने कहा कि पेंशन भुगतान में पारदर्शिता और सरकारी धन की सुरक्षा आवश्यक है, लेकिन नियंत्रण व्यवस्था ऐसी नहीं होनी चाहिए जिससे लाखों निर्दोष वृद्ध एवं पारिवारिक पेंशनरों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़े।

नाम में मामूली अंतर पर पेंशन रोकने का विरोध

ज्ञापन में कहा गया है कि पुराने PPO, सेवा अभिलेख, बैंक खाते, PAN और आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग, मात्रा, स्पेसिंग अथवा initials में सामान्य अंतर हो सकता है। ऐसे तकनीकी अंतर को पहचान-संदेह मानकर नियमित पेंशन रोकना उचित नहीं है।

संस्थान ने मांग की है कि किसी भी तकनीकी mismatch की स्थिति में सक्षम अधिकारी द्वारा PPO, सेवा अभिलेख, बैंक KYC, PAN और आधार सहित संबंधित अभिलेखों का परीक्षण कर वास्तविक पहचान सुनिश्चित की जाए। केवल software flag के आधार पर पेंशन रोकने की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए।

हर कोषागार में बने ‘पेंशन हेल्प डेस्क’

पेंशनरों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रत्येक कोषागार में “Pension Data Correction & Help Desk” स्थापित करने की मांग की गई है। संस्थान के अनुसार इससे पेंशनरों को डेटा सुधार और दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकेगी।

पारिवारिक पेंशन की प्रक्रिया हो सरल

संस्थान ने पारिवारिक पेंशन की प्रक्रिया को भी सरल बनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पेंशनर की मृत्यु के बाद परिवार पहले से ही मानसिक और आर्थिक संकट में होता है। ऐसे में वृद्ध पति या पत्नी को बैंक, आधार केंद्र, कोषागार और पुराने विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें।

वृद्ध, अशक्त, दिव्यांग तथा तकनीकी साधनों से अपरिचित पेंशनरों के लिए डिजिटल व्यवस्था के साथ वैकल्पिक ऑफलाइन व्यवस्था भी जारी रखने की मांग की गई है। साथ ही जीवन प्रमाणपत्र के डिजिटल एवं गैर-डिजिटल दोनों विकल्प उपलब्ध रखने की बात कही गई है।

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पेंशनर संगठनों से परामर्श की मांग

ज्ञापन में कहा गया है कि पेंशन भुगतान, PPO, बैंक खाता, पारिवारिक पेंशन और जीवित प्रमाणपत्र से जुड़ी व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण बदलाव से पहले पेंशनर संगठनों से संस्थागत परामर्श और practical testing कराया जाना चाहिए।

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इसके अलावा पेंशन सलाहकार समिति की बैठक तत्काल आयोजित कर उसकी नियमित समय-सारणी तय करने

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