- ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे गैर-स्थानीय मजदूरों को बनाया निशाना, गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेरा
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श्रीनगर/कुलगाम। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकियों ने एक बार फिर बेगुनाह गैर-स्थानीय मजदूरों को निशाना बनाकर दहशत फैलाने की कोशिश की। किलाम इलाके में ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों पर आतंकियों ने अचानक गोलियां बरसा दीं। हमले में एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल दूसरे मजदूर ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस हमले ने एक बार फिर घाटी की सुरक्षा व्यवस्था और बाहर से काम करने आए मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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बताया जा रहा है कि दोनों मजदूर रोज की तरह ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने के बाद दोनों मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और अन्य मजदूरों में दहशत फैल गई।
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घायल मजदूरों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी हालत बेहद गंभीर थी। एक मजदूर ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दूसरे की इलाज के दौरान मौत हो गई। दोनों मृतक छत्तीसगढ़ के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
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हमलावरों की तलाश में बड़ा सर्च ऑपरेशन
आतंकी हमले की सूचना मिलते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं। पूरे इलाके की घेराबंदी कर संदिग्धों की तलाश शुरू कर दी गई है। आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है और हमलावरों के संभावित ठिकानों की जांच की जा रही है।
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सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमलावर कितने थे, वे किस रास्ते से आए और वारदात को अंजाम देने के बाद किस दिशा में फरार हुए। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
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21 महीने बाद प्रवासी मजदूरों पर बड़ा हमला
रिपोर्टों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में करीब 21 महीने बाद गैर-स्थानीय मजदूरों को निशाना बनाकर इस तरह का बड़ा आतंकी हमला हुआ है। इस घटना ने घाटी में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के बीच भय और चिंता बढ़ा दी है।
पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रुपये की सहायता
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हमले की निंदा करते हुए मृतक मजदूरों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। सरकार ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।
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बड़ा सवाल—कब तक बेगुनाह मजदूर बनते रहेंगे आतंकियों का निशाना?
रोजगार की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर दूर पहुंचकर मेहनत-मजदूरी करने वाले इन श्रमिकों को आतंकियों ने निशाना बनाया। इस कायराना हमले ने फिर साबित कर दिया कि आतंक का मकसद सिर्फ जान लेना नहीं, बल्कि आम लोगों के बीच डर का माहौल पैदा करना भी है। अब सुरक्षा एजेंसियों के सामने हमलावरों को जल्द पकड़ने और घाटी में काम कर रहे गैर-स्थानीय मजदूरों की सुरक्षा मजबूत करने की बड़ी चुनौती है।





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