- 20-25 परिवारों की उपजाऊ जमीन नदी की चपेट में, खड़ी फसलों को भारी नुकसान
- प्रधान कपिल ठाकुर ने किया मौका निरीक्षण, ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की
भटौली कला में 20-25 परिवारों की उपजाऊ जमीन नदी की चपेट में, खड़ी फसलों को भारी नुकसान; प्रधान कपिल ठाकुर ने किया मौका निरीक्षण
बद्दी, 30 अगस्त। सतीश जैन। भटौली कला में खनन के कारण नदी के बदले रुख और लगातार हो रही बारिश ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। नदी में आई भीषण बाढ़ के चलते किसानों की उपजाऊ जमीन लगातार कटाव की चपेट में आ रही है। कई किसानों की जमीन का बड़ा हिस्सा नदी में बह चुका है, जबकि बची हुई जमीन पर भी खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, नदी पहले जिस स्थान से होकर बहती थी, अब उसका रुख बदलकर किसानों की जमीन की ओर हो गया है। इससे करीब 20 से 25 परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि उनकी आय का प्रमुख साधन यही कृषि भूमि है और नदी के कटाव से न केवल जमीन बल्कि खड़ी फसलों को भी भारी नुकसान हो रहा है।
मौका निरीक्षण के दौरान नदी में आया तेज बहाव
समस्या की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत भटौली कला के प्रधान कपिल ठाकुर ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नदी में अचानक तेज और भयानक बाढ़ का पानी आ गया। ग्रामीणों ने बताया कि पानी का बहाव इतना तेज था कि मौके पर मौजूद कुछ बच्चों को आवाज लगाकर सुरक्षित स्थान की ओर भागने के लिए कहना पड़ा।
ग्रामीणों ने प्रधान को बताया कि यदि इसी तरह बारिश जारी रही और नदी का पानी किसानों की जमीन की ओर बहता रहा तो आने वाले समय में बड़ी मात्रा में उपजाऊ भूमि नदी में समा सकती है। किसानों का कहना है कि आज जो जमीन खेत है, वह कल नदी का हिस्सा बन सकती है।
किसानों ने जताई चिंता, सरकारी संस्थान भी खतरे की जद में
ग्रामीणों के मुताबिक, कई किसानों की जमीन पहले ही नदी के कटाव में बह चुकी है। प्रभावित किसानों में मदनलाल, सुरेंद्र कुमार, जोगिंदर सिंह, जीत कुमार, जगदीश चंद्र, मोहनलाल, देवराज, गुरबचन, राम प्रकाश, रामलाल, मेहर चंद, रामपाल, रामदयाल फौजी, राम प्रकाश, रामगोपाल, रामस्वरूप फौजी, रणजीत सिंह, अवतार सिंह राणा, रणजीत सिंह और दीवान चंद सहित अन्य किसान शामिल हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी के बदलते रुख और लगातार हो रहे भूमि कटाव का तत्काल समाधान किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते नदी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसानों की बची हुई जमीन भी सुरक्षित नहीं रह पाएगी।
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ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई कि यदि नदी का पानी इसी तरह जमीन की ओर बढ़ता रहा तो किसानों की जमीन के साथ-साथ सरकारी संस्थान भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में प्रशासन को मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल मौके का निरीक्षण कर स्थायी समाधान की दिशा में कार्रवाई करनी चाहिए।





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