नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब की अहम East-West तेल पाइपलाइन के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेज उछाल आया है। मंगलवार, 15 सितंबर को Brent crude $106.93 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि बाद के कारोबार में यह $108 प्रति बैरल से ऊपर भी चला गया। Reuters के मुताबिक सप्लाई बाधित होने की आशंका के बीच तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है।
सऊदी की अहम पाइपलाइन ठप, वैश्विक सप्लाई पर खतरा
सऊदी अरब की करीब 1,200 किलोमीटर लंबी East-West पाइपलाइन पूर्वी तेल क्षेत्रों से लाल सागर के तट पर स्थित Yanbu तक कच्चा तेल पहुंचाती है। यह मार्ग Strait of Hormuz का वैकल्पिक रास्ता माना जाता है। हालिया ड्रोन हमले के बाद पाइपलाइन को बंद कर दिया गया है। Reuters के अनुसार यह पाइपलाइन करीब 40-50 लाख बैरल प्रतिदिन तेल ले जाती रही है, जो वैश्विक सप्लाई का लगभग 4-5% है।
पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है तो सऊदी अरब की तेल निर्यात क्षमता पर गंभीर असर पड़ सकता है। कुछ रिपोर्टों में Yanbu के मौजूदा भंडार से केवल कुछ दिनों तक निर्यात जारी रखने की क्षमता की बात कही गई है।
भारत पर महंगे तेल का असर: रुपया, महंगाई और पेट्रोल-डीजल पर नजर
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए चिंता बढ़ाने वाली है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। लंबे समय तक तेल महंगा रहने पर आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। इसका असर महंगाई, परिवहन लागत और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
महंगे तेल से एयरलाइंस, लॉजिस्टिक्स, पेंट, केमिकल और कई अन्य उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। वहीं शेयर बाजार में भी निवेशक तेल कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर नजर रखेंगे।
महंगाई बढ़ी: अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82%, RBI के सामने बढ़ी चुनौती
बाजार की अगली नजर इस बात पर है कि सऊदी पाइपलाइन कितनी जल्दी बहाल होती है और पश्चिम एशिया में सप्लाई संकट कितना लंबा खिंचता है। अगर व्यवधान बढ़ता है तो Brent में और तेजी की आशंका बाजार की चिंता बढ़ा सकती है। Reuters ने मंगलवार के शुरुआती कारोबार में Brent को $106.93 और WTI को $102.65 प्रति बैरल बताया था।


