निदेशालय के आदेश के बावजूद जॉइनिंग नहीं, कंपनी का दावा—जून में लेटर जारी हुआ, प्राचार्य के कहने पर वापस लिया गया
पत्नी के गहने बेचकर पैरवी करने का दावा; विभागीय परिपत्र ने खड़े किए नियमों और प्रक्रिया पर बड़े सवाल
*जिला संवाददाता*
*राजगढ़।* राजगढ़ पॉलिटेक्निक में तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को हटाए जाने और दोबारा जॉइनिंग न दिए जाने का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। मामला केवल तीन कर्मचारियों की नौकरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि निदेशालय के आदेश, विभागीय नियमों, आउटसोर्सिंग कंपनी की भूमिका और नए अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
राष्ट्रीय लोक अदालत में 1.03 लाख मामलों का निस्तारण, 18 दंपतियों का घर फिर बसा।
शिक्षा निदेशक प्रभाकर मिश्रा के अनुसार, उन्होंने पत्र लिखकर प्राचार्य और संबंधित कंपनी को निर्देश दिया था कि हटाए गए तीनों आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को वापस जॉइन कराया जाए। इसके बावजूद तीनों कर्मचारियों को संस्थान में कार्यभार ग्रहण नहीं करने दिया गया।
*जून में जॉइनिंग लेटर जारी, फिर किसके कहने पर हुआ वापस?*
मामले में ओमेक्स सिक्योरिटी सर्विस के डायरेक्टर से बातचीत में दावा किया गया कि जून 2026 में तीनों कर्मचारियों को जॉइनिंग लेटर जारी कर दिया गया था। कंपनी के डायरेक्टर के मुताबिक, बाद में प्राचार्य के इशारे पर जॉइनिंग लेटर वापस ले लिया गया और प्राचार्य की ओर से सुझाए गए अभ्यर्थी को कंपनी की तरफ से रखे जाने की बात सामने आई।
यदि कंपनी का यह दावा सही है तो सवाल उठना लाजिमी है कि जॉइनिंग लेटर जारी होने के बाद उसे वापस लेने का निर्देश किस स्तर से दिया गया और इसके लिए विभागीय प्रक्रिया क्या अपनाई गई?
बठिंडा जिले में ‘खेदान वतन पंजाब दियां-2026’ के तहत 17 से 26 सितंबर तक ब्लॉक लेवल क्रिकेट टूर्नामेंट
*विभागीय परिपत्र ने बढ़ाई बेचैनी, कर्मचारी बदलने की प्रक्रिया पर सवाल*
मामले में सामने आया प्राविधिक शिक्षा निदेशालय का परिपत्र भी इस पूरे विवाद में अहम हो गया है। उपलब्ध दस्तावेज में आउटसोर्सिंग कार्मिकों को बदलने/सेवा से मुक्त करने की प्रक्रिया से जुड़े निर्देश हैं। इसमें निर्धारित प्रक्रिया, सक्षम स्तर की स्वीकृति और आउटसोर्सिंग पदों पर लागू आरक्षण व्यवस्था के अनुपालन की बात कही गई है।
गणेश उत्सव को लेकर पुलिस का फुल एक्शन! 250 पंडालों पर तीसरी आंख की नजर, ड्रोन से आसमान भी होगा स्कैन
ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या राजगढ़ पॉलिटेक्निक में दस वर्षों से काम कर रहे तीनों कर्मचारियों को हटाने से पहले निर्धारित विभागीय प्रक्रिया पूरी की गई थी? क्या मामले की सूचना निदेशालय को दी गई और सक्षम स्तर से अनुमति ली गई?
*छह हजार से करीब 25 हजार पारिश्रमिक पहुंचा तो बदल गई तस्वीर?*
बताया जा रहा है कि तीनों कर्मचारी करीब दस वर्षों से संस्थान में कार्यरत थे और लंबे समय तक लगभग छह हजार रुपये के पारिश्रमिक पर काम करते रहे। आउटसोर्सिंग व्यवस्था में बदलाव के बाद पारिश्रमिक में काफी वृद्धि हुई और करीब 25 हजार रुपये तक भुगतान होने की बात सामने आई।
राष्ट्रीय लोक अदालत में 1.03 लाख मामलों का निस्तारण, 18 दंपतियों का घर फिर बसा।
आरोप है कि इसके बाद तीनों पुराने कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और उनकी जगह नए लोगों को रखे जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि नए अभ्यर्थियों में प्राचार्य की पसंद के लोगों को जगह दी गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच अभी बाकी है।
*नौकरी बचाने के लिए पत्नी के गहने बेचने का दावा*
मामले का सबसे दर्दनाक पहलू प्रभावित कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति से जुड़ा है। अभ्यर्थियों का दावा है कि नौकरी वापस पाने की पैरवी के लिए उन्हें अपनी पत्नी के गहने तक बेचने पड़े।
उनका कहना है कि विद्यालय स्तर से लेकर शासन में बैठे अधिकारियों तक अपनी फरियाद पहुंचाने और पैरवी करने के लिए वे लगातार प्रयास कर रहे हैं। दस वर्षों तक काम करने के बाद नौकरी चले जाने से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने की बात कही जा रही है।
*प्राचार्य ने आरोपों से किया किनारा*
जब नेशन स्टेशन न्यूज़ ने प्राचार्य से मामले पर बातचीत की तो उन्होंने पूरे प्रकरण में अपनी भूमिका से इनकार किया। उनका कहना था कि इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है और जिम्मेदारी आउटसोर्सिंग कंपनी की है।
नरैनी में सपा की पीडीए चर्चा एवं जनसंवाद बैठक, 2027 में सरकार बनाने का आह्वान
वहीं कंपनी के डायरेक्टर की ओर से प्राचार्य के इशारे पर जॉइनिंग लेटर वापस लेने का दावा किया गया है। दोनों पक्षों के बयानों में यह विरोधाभास अब जांच का विषय बन गया है।
सरकार की ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर भी सवाल
प्रदेश सरकार की ओर से भ्रष्टाचार पर रोक और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हितों को लेकर लगातार सख्त संदेश दिए जाते रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य की ओर से सार्वजनिक मंचों पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख की बात कही जाती रही है।
ऐसे में यदि किसी आउटसोर्सिंग कर्मचारी को बिना स्पष्ट कारण, निर्धारित प्रक्रिया और सक्षम स्तर की जानकारी/अनुमोदन के बिना हटाए जाने की पुष्टि होती है, तो ऐसे मामले सरकार की घोषित नीतियों और मंशा के विपरीत तस्वीर पेश कर सकते हैं।
सरकार का संदेश यह रहा है कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था में पैसे के लेन-देन और मनमानी पर रोक होनी चाहिए तथा किसी कर्मचारी को मनमाने तरीके से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए राजगढ़ पॉलिटेक्निक का मामला सामने आने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का पालन हो रहा है?
*भ्रष्टाचार हुआ या नहीं, जांच से ही खुलेगा राज*
दस वर्षों से कार्यरत तीन कर्मचारियों को हटाया जाना, जून में जॉइनिंग लेटर जारी होने के बाद उसके कथित तौर पर वापस लिए जाने का दावा, नए अभ्यर्थियों की नियुक्ति और शिक्षा निदेशक के आदेश के बावजूद जॉइनिंग न मिलना—इन घटनाओं को एक साथ देखने पर भ्रष्टाचार या आर्थिक हित की आशंका की जांच की मांग सामने आ रही है।
हालांकि भ्रष्टाचार का आरोप अभी सिद्ध नहीं हुआ है, लेकिन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि पुराने कर्मचारियों को हटाने का वास्तविक आधार क्या था, नए लोगों का चयन किस प्रक्रिया से हुआ और कहीं किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन या प्रभाव तो इस्तेमाल नहीं किया गया।
अब पांच सवालों के जवाब जरूरी
1. शिक्षा निदेशक के आदेश के बावजूद तीनों कर्मचारियों को जॉइनिंग क्यों नहीं मिली?
2. जून 2026 में जारी जॉइनिंग लेटर वापस क्यों लिया गया?
3. क्या तीनों कर्मचारियों को हटाने से पहले निदेशालय को सूचना और सक्षम स्तर से अनुमोदन लिया गया?
4. नए अभ्यर्थियों को किस प्रक्रिया से रखा गया?
5. क्या पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन या भ्रष्टाचार हुआ?
राजगढ़ पॉलिटेक्निक का यह मामला अब तीन कर्मचारियों की नौकरी से आगे बढ़कर सरकारी आदेशों और विभागीय व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा कर रहा है। यदि जांच निष्पक्ष तरीके से होती है तो यह साफ हो सकता है कि तीनों पुराने कर्मचारियों को हटाने के पीछे वास्तविक कारण क्या था और नए लोगों को रखने की प्रक्रिया नियमों के मुताबिक थी या नहीं।
नेशन स्टेशन न्यूज़ इस मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और सभी संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर आगे भी पड़ताल जारी रखेगा।





Total Users : 127566
Total views : 162008