नेपाल में जलप्रलय से तबाही, बिहार में हाई अलर्ट

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  • नेपाल में फ्लैश फ्लड से सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित; गंडक से जुड़े बिहार के जिलों में बढ़ी निगरानी
  • NDRF-SDRF की टीमें तैयार, निचले इलाकों और नदी किनारे बसे गांवों पर प्रशासन की खास नजर

अमित शाह ने CM सम्राट चौधरी से फोन पर ली स्थिति की जानकारी, NDRF अलर्ट; गंडक से जुड़े जिलों में विशेष सतर्कता

नई दिल्ली/पटना/काठमांडू। नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे रसुवा, नुवाकोट और धादिंग क्षेत्रों में बाढ़ के तेज बहाव ने सड़कें, पुल, वाहन, बस्तियां और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। हालात को देखते हुए भारत और नेपाल सीमा से लगे बिहार के इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।

अमित शाह ने सम्राट चौधरी से की बात

नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार में संभावित खतरे को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से फोन पर बातचीत की। उन्होंने राज्य के हालात और प्रशासन की तैयारियों की जानकारी ली तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए केंद्र की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। गृह मंत्रालय की ओर से NDRF को भी आपात स्थिति के लिए तैयार रखा गया है।

बिहार सरकार ने नेपाल से आने वाली नदियों, खासकर गंडक नदी प्रणाली, के जलस्तर में अचानक वृद्धि की आशंका को देखते हुए संवेदनशील जिलों में प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली समेत कई जिलों में निगरानी बढ़ाई गई है।

NDRF-SDRF की टीमें तैयार

संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए बिहार में NDRF और SDRF की टीमें तैयार रखी गई हैं। पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर सहित संवेदनशील क्षेत्रों में राहत-बचाव की तैयारियों को मजबूत किया गया है। प्रशासन को निचले इलाकों और नदी किनारे बसे गांवों पर विशेष नजर रखने को कहा गया है।

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नेपाल में पुल, सड़क और बिजली परियोजनाएं तबाह

नेपाल में बाढ़ का सबसे भयावह असर रसुवा जिले में दिखाई दिया है। भोटेकोशी नदी में अचानक आए तेज बहाव ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। बेट्रावती से रसुवागढ़ी सीमा तक करीब 42 किलोमीटर सड़क को कई स्थानों पर नुकसान पहुंचा है और कई कंक्रीट पुल बह गए हैं। चीन सीमा तक जाने वाला महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग भी प्रभावित हुआ है।

प्रारंभिक आकलन के मुताबिक रसुवा और आसपास के क्षेत्रों में 13 हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें आठ संचालित और पांच निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं। प्रभावित परियोजनाओं की कुल क्षमता करीब 748 मेगावाट बताई गई है। हालांकि नुकसान का अंतिम आकलन अभी बाकी है।

बाढ़ के पानी में बड़ी संख्या में वाहन और माल बहने की खबरें हैं। कई इलाकों में संचार और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित महत्वपूर्ण जियारोंग पोर्ट क्षेत्र में भी भूस्खलन और बाढ़ से संपर्क व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है।

सैकड़ों लोग लापता, भारतीय नागरिक भी शामिल

बाढ़ के बाद लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग एजेंसियों से आंकड़े सामने आ रहे हैं। प्रारंभिक रिपोर्टों में करीब 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। भारतीय नागरिक भी लापता लोगों में शामिल बताए जा रहे हैं। बचाव अभियान लगातार जारी है और खराब मौसम तथा क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण राहत कार्य में मुश्किलें आ रही हैं।

भारत और चीन ने बढ़ाया मदद का हाथ

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नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा के बीच भारत और चीन दोनों ने राहत एवं बचाव में सहयोग की पेशकश की है। भारत की ओर से नेपाल को सहायता का भरोसा दिया गया है, जबकि चीन ने तिब्बत की ओर प्रभावित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बचाव दल सक्रिय किए हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल में बाढ़ से हुए जान-माल के नुकसान पर संवेदना जताते हुए मदद का भरोसा दिया है।

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फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बनी स्थिति का असर नीचे की ओर बहने वाली नदियों पर कितना पड़ता है। इसी वजह से बिहार प्रशासन गंडक नदी और उससे जुड़े जिलों में लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।

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