दशाश्वमेध घाट पर माँ गंगा का भव्य हरियाली और झूला श्रृंगार

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वाराणसी। काशी के दशाश्वमेध घाट पर मंगलवार को गंगोत्री सेवा समिति की ओर से आयोजित गंगा आरती के दौरान माँ गंगा का विशेष हरियाली एवं झूला श्रृंगार किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद फूलों, फलों और प्राकृतिक हरियाली से माँ गंगा का दिव्य श्रृंगार किया गया। इस दौरान घाट पर भक्तिमय माहौल रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आरती में सहभागिता की।

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कार्यक्रम की शुरुआत माँ गंगा के पूजन-अर्चन से हुई। आचार्यों और समिति के सदस्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगाजल, पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन, फल सहित विभिन्न पूजन सामग्रियां अर्पित कर माँ गंगा का आह्वान किया। धूप-दीप प्रज्वलित कर आरती और स्तुति की गई। श्रद्धालुओं ने भी पुष्प अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।

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फूलों और फलों से सजा दिव्य स्वरूप

पूजन के बाद माँ गंगा का विशेष हरियाली श्रृंगार किया गया। हरे पत्तों, बेलपत्र, मौसमी हरियाली और सुगंधित पुष्पों से आकर्षक सजावट की गई। विभिन्न प्रकार के फूलों और फलों से श्रृंगार को भव्य रूप दिया गया। प्राकृतिक सामग्री से तैयार इस सजावट ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया।

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झूला श्रृंगार बना आकर्षण

हरियाली श्रृंगार के साथ माँ गंगा का झूला श्रृंगार भी किया गया। फूलों और हरियाली से सजे झूले के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। माँ गंगा के मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित किए और भक्तिभाव से आरती में हिस्सा लिया।

शंखनाद और मंत्रोच्चार से गूंजा घाट

विशेष श्रृंगार के बाद दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा आरती हुई। शंखनाद, घंटियों और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा घाट गूंज उठा। दीपों की रोशनी और पुष्पों से सजे माँ गंगा के स्वरूप ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।

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गंगोत्री सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य सनातन परंपराओं और धार्मिक संस्कृति को जीवंत रखने के साथ प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना भी है। समिति के अनुसार, हरियाली और प्राकृतिक वस्तुओं से किए गए श्रृंगार के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। माँ गंगा के प्रति आस्था के साथ स्वच्छता, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेना भी प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

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