रेलवे की बड़ी तैयारी: 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में मिलेंगी 1,431 बर्थ, लंबी दूरी के यात्रियों को बड़ा फायदा

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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे लंबी दूरी के यात्रियों को बड़ी सौगात देने की तैयारी में है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का अब 24 कोच वाला बड़ा संस्करण तैयार किया जा रहा है। इसका मकसद मौजूदा स्लीपर वंदे भारत की तुलना में अधिक यात्रियों को आधुनिक और आरामदायक सफर उपलब्ध कराना है। रेलवे की योजना के मुताबिक 24 कोच वाली इस ट्रेन में कुल 1,431 बर्थ उपलब्ध होंगी।

 

24 कोच में क्या होगा खास?

 

रेलवे के आधिकारिक तकनीकी दस्तावेज के अनुसार 24-कोच वाले स्लीपर ट्रेनसेट में 19 एसी थ्री-टियर, 4 एसी टू-टियर और 1 एसी फर्स्ट क्लास कोच होंगे। इनमें क्रमशः 1,215, 192 और 24 बर्थ निर्धारित हैं। यानी एक पूरी ट्रेन में न्यूनतम 1,431 यात्रियों के लिए बर्थ उपलब्ध होंगी।

 

इस तरह मौजूदा 16-कोच स्लीपर कॉन्फिगरेशन की तुलना में यात्री क्षमता काफी बढ़ जाएगी। 16-कोच वाले ट्रेनसेट में 887 बर्थ का प्रावधान है, जबकि 24-कोच वाले संस्करण में यह संख्या बढ़कर 1,431 हो जाती है।

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कब तक तैयार हो सकता है पहला प्रोटोटाइप?

 

रिपोर्टों के मुताबिक 24-कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन अभी डिजाइन और विकास के चरण में है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में इसके निर्माण की योजना है और पहला प्रोटोटाइप 2026 के अंत तक तैयार किए जाने का लक्ष्य बताया गया है।

 

रेलवे के पहले से उपलब्ध दस्तावेजों में भी 24-कोच कॉन्फिगरेशन वाली वंदे भारत स्लीपर रेक के निर्माण की योजना दर्ज है। इसमें ICF चेन्नई में ऐसी 50 रेक तैयार करने की परिकल्पना की गई थी।

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लंबी दूरी के यात्रियों के लिए क्यों अहम है यह ट्रेन?

वंदे भारत स्लीपर को खासतौर पर लंबी और मध्यम दूरी की यात्राओं के लिए विकसित किया जा रहा है। 24 कोच होने से एक ट्रेन में अधिक यात्रियों को बर्थ मिल सकेंगी। इससे ज्यादा मांग वाले रूटों पर वेटिंग कम करने और ज्यादा यात्रियों को प्रीमियम स्लीपर सुविधा देने में मदद मिल सकती है।

 

रेलवे के मुताबिक स्लीपर वंदे भारत में बेहतर क्रैश-वर्थिनेस, आधुनिक कपलर, विश्वस्तरीय इंटीरियर और विमान जैसे आधुनिक टॉयलेट पैनल जैसी सुविधाओं पर जोर दिया गया है।

 

यात्रियों को मिल सकती हैं ये आधुनिक सुविधाएं

 

नई पीढ़ी की वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई आधुनिक सुविधाएं प्रस्तावित हैं। इनमें—

 

  • आरामदायक स्लीपर बर्थ
  • – प्रत्येक यात्री के लिए चार्जिंग सुविधा
  • – पढ़ने के लिए अलग लाइट
  • – आधुनिक और बेहतर डिजाइन वाला इंटीरियर
  • – सामान रखने के लिए बेहतर व्यवस्था
  • – आधुनिक टॉयलेट
  • – दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं
  • – यात्री सूचना और मनोरंजन से जुड़ी सुविधाएं
  • – बेहतर सुरक्षा प्रणाली

शामिल हैं।

मौजूदा स्लीपर वंदे भारत से कितनी अलग होगी?

देश में वंदे भारत स्लीपर सेवा की शुरुआत 16-कोच वाले ट्रेनसेट से हुई। केंद्र सरकार के मार्च 2026 के आधिकारिक अपडेट के अनुसार उस समय हावड़ा-कामाख्या वंदे भारत स्लीपर सेवा रेलवे नेटवर्क पर संचालित हो रही थी।

 

24-कोच वाला नया संस्करण इसी अवधारणा को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसका सबसे बड़ा अंतर यात्री क्षमता होगा। 24 कोच के कारण एक रेक में करीब डेढ़ हजार यात्रियों के लिए स्लीपर बर्थ उपलब्ध हो सकेंगी।

 

अभी क्या साफ नहीं है?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 24-कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को अभी किसी खास रूट पर नियमित रूप से चलाने की घोषणा नहीं हुई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी इसे रेलवे की निर्माण एवं विकास योजना के रूप में सामने रखती है। इसलिए किसी विशेष शहर या रूट पर इसके संचालन की खबर को अभी अंतिम मानना जल्दबाजी होगी।

 

रेलवे पहले प्रोटोटाइप तैयार करेगा, इसके बाद परीक्षण और आवश्यक अनुमोदन की प्रक्रिया होगी। उसके बाद ही व्यावसायिक संचालन और रूट को लेकर अंतिम फैसला होने की उम्मीद है।

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रेलवे के लिए क्यों बड़ा कदम?

भारतीय रेलवे में लंबी दूरी की प्रीमियम यात्रा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में 24-कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन रेलवे के लिए क्षमता बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। एक ही ट्रेन में अधिक यात्रियों को आधुनिक स्लीपर सुविधा उपलब्ध कराने से व्यस्त मार्गों पर क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।

 

बस पलटी… फ्लाइट छूटी और विदेश की नौकरी भी गई!

 

सीतापुर में उपभोक्ता आयोग ने UPSRTC की लापरवाही पर बड़ा फैसला सुनाया है। 2022 में बस हादसे के कारण यात्री अंशुल सहाय समय पर दिल्ली नहीं पहुंच सके और उनकी विदेश जाने वाली फ्लाइट छूट गई

 

अगर रोडवेज की लापरवाही से आपकी फ्लाइट छूट जाए, तो क्या पूरा नुकसान मिलना चाहिए?

अपनी राय कमेंट में बताइए। 👇

हालांकि फिलहाल इसे ‘जल्द पटरी पर उतरने वाली 24-कोच ट्रेन’ के बजाय ‘रेलवे की निर्माणाधीन/प्रस्तावित 24-कोच वंदे भारत स्लीपर परियोजना’ कहना ज्यादा सही होगा। पहला प्रोटोटाइप 2026 के अंत तक तैयार होने का लक्ष्य बताया गया है।

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