- “टावर पर चढ़ा पूर्व कर्मचारी, सिस्टम के खिलाफ खोला मोर्चा”
- तीसरी बार चढ़ गया है पूर्व संविदा रोडवेज कर्मचारी
- “पहले भी दे चुका चेतावनी, फिर क्यों नहीं जागा विभाग?”
लखनऊ: राजधानी के कैसरबाग इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब रोडवेज का एक पूर्व संविदा कर्मचारी मोबाइल टावर पर चढ़ गया और भ्रष्टाचार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। यह कर्मचारी कोई और नहीं, बल्कि अलीगढ़ क्षेत्र के अतरौली डिपो में कार्य कर चुका संविदा चालक राजू सैनी है, जो पहले भी इसी तरह टावर पर चढ़कर विरोध दर्ज करा चुका है।
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“अब जान जाएगी, लेकिन अन्याय नहीं सहेंगे”
टावर पर चढ़े राजू सैनी का साफ कहना है कि वह विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार, शोषण और अनदेखी से तंग आ चुका है। नीचे खड़े अधिकारियों और पुलिस से वह लगातार अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद करता रहा। उसका आरोप है कि:
संविदा कर्मचारियों का शोषण लगातार जारी है
शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती
अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार चरम पर है
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पहले भी दोहरा चुका है ये कदम
यह कोई पहली घटना नहीं है। राजू सैनी इससे पहले भी अपनी मांगों को लेकर कैसरबाग के इसी टावर पर चढ़ चुका है।
प्रशासन मौके पर, लेकिन समाधान कहाँ?
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंच गया। समझाने-बुझाने की कोशिशें जारी रहीं, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़ा रहा।
यह दृश्य केवल एक व्यक्ति का विरोध नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर उठता हुआ सवाल है।
बड़ा सवाल — जिम्मेदार कौन?
अगर कोई कर्मचारी बार-बार जान जोखिम में डालकर विरोध कर रहा है, तो जिम्मेदारी किसकी है?
क्या यह सिस्टम की विफलता नहीं?
क्या संविदा कर्मचारियों को सिर्फ इस्तेमाल कर छोड़ दिया जाता है?
Nation Station News का सवाल
- क्या सरकार और विभाग तब जागेंगे जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा?
निष्कर्ष:
कैसरबाग का यह टावर अब सिर्फ एक लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ उठती आवाज का प्रतीक बन चुका है।
राजू सैनी का यह कदम चेतावनी है — अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, तो ऐसे विरोध और उग्र हो सकते हैं।
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