विधायक के हस्तक्षेप के बाद जल निगम ने लिखित आश्वासन देकर मांगी 20 दिन की मोहलत
तीनों ग्राम पंचायतों में रोजाना दो-दो टैंकर से होगी अंतरिम जलापूर्ति, लड्डू खिलाकर अनशन समाप्त
बदौसा (बांदा)। रिपोर्टर अरविंद श्रीवास्तव, जिला संवाददाता
पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग पर किया जा रहा पांच दिवसीय जल सत्याग्रह बुधवार को प्रशासनिक और विधायी हस्तक्षेप के बाद समाप्त हो गया। बदौसा, दुवरिया और बरछा बा ग्राम पंचायतों की नदी टोला बस्तियों में लंबे समय से व्याप्त पेयजल संकट को लेकर ग्रामीण अनशन पर बैठे थे।
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आंदोलन के पांचवें दिन नरैनी क्षेत्र की विधायक श्रीमती ओमवती वर्मा धरना स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और जल निगम के अधिकारियों को मौके पर ही त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। विधायक ने अधिकारियों से पेयजल संकट के स्थायी समाधान को लेकर जवाब मांगा।
इसके बाद जल निगम (ग्रामीण) के अधिशासी अभियंता विमल कुमार वर्मा और जूनियर इंजीनियर मुकेश कुमार चौधरी ने आगामी 20 दिनों के भीतर क्षेत्र में स्थायी पेयजल आपूर्ति बहाल करने का लिखित आश्वासन दिया। अधिकारियों ने डायरी पर अपनी प्रतिबद्धता दर्ज कराते हुए निर्धारित अवधि में पाइपलाइन को पूरी तरह क्रियाशील करने की बात कही।
*हजारों नागरिकों ने जताया समर्थन*
जल सत्याग्रह के पांचवें दिन धरना स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुटी। महिला-पुरुषों के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। ब्राह्मण महासभा सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों की पेयजल समस्या के समाधान की मांग उठाई।
अधिकारियों ने बताया कि बस्तियों तक सुचारू जलापूर्ति में तकनीकी बाधाएं आ रही हैं, जिन्हें दूर करने के लिए 20 दिनों का समय मांगा गया है।
*स्थायी समाधान तक रोज दौड़ेंगे छह टैंकर*
स्थायी पेयजल व्यवस्था बहाल होने तक ग्रामीणों को राहत देने के लिए अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत बदौसा, दुवरिया और बरछा बा ग्राम पंचायतों में प्रतिदिन दो-दो पानी के टैंकर भेजे जाएंगे। इस तरह तीनों ग्राम पंचायतों में रोजाना छह टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जाएगी।
लिखित आश्वासन मिलने के बाद विधायक ओमवती वर्मा ने अनशनकारियों को लड्डू खिलाकर पांच दिवसीय अनशन समाप्त कराया। हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित 20 दिनों में पेयजल समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो वे बिना पूर्व सूचना के दोबारा व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।


