पर्युषण पर्व पर गूंजा त्याग और संयम का संदेश, धर्म ध्वजा फहराकर लिया महावीर के सिद्धांतों पर चलने का संकल्प

पर्युषण पर्व पर गूंजा त्याग और संयम का संदेश, धर्म ध्वजा फहराकर लिया महावीर के सिद्धांतों पर चलने का संकल्प
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लोभ, मोह, क्रोध और अहंकार के त्याग को बताया उत्तम त्याग धर्म का सार

मां जिनवाणी की आरती, भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ जैन चौत्यालय

बांदा। रिपोर्टर अरविंद श्रीवास्तव, जिला संवाददाता

पर्युषण पर्व के आठवें दिन जैन समाज ने उत्तम त्याग धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ की। छोटी बाजार स्थित जैन चौत्यालय जी में धर्म ध्वजा फहराई गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में उतारने और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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कार्यक्रम में उत्तम त्याग धर्म की महिमा बताते हुए कहा गया कि त्याग का अर्थ केवल धन-संपत्ति छोड़ना नहीं, बल्कि मन में बसे लोभ, मोह, अहंकार, क्रोध और राग-द्वेष जैसी कषायों का त्याग करना भी है। भगवान महावीर स्वामी ने राजसी वैभव का त्याग कर संयम और आत्मकल्याण का मार्ग अपनाया, जिसे त्याग का श्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है।

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श्रद्धालुओं ने कहा कि यदि मनुष्य अपनी स्वार्थपूर्ण इच्छाओं और बुराइयों का त्याग कर अहिंसा, सत्य और संयम को जीवन में अपनाए तो समाज में प्रेम और सद्भाव बढ़ सकता है। इसी उद्देश्य से धर्म ध्वजा फहराकर भगवान महावीर के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने और विश्व में अमन-चैन तथा सुख-शांति की कामना की गई।

कार्यक्रम के दौरान मां जिनवाणी की श्रद्धापूर्वक आरती की गई। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और स्तुति के साथ मां जिनवाणी की आराधना की। पूरा चौत्यालय भक्तिमय माहौल में नजर आया।

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अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलने और जीवन में त्याग व संयम को अपनाने का संकल्प लिया।

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