महिला परिचालक से गाली गलौज , मेडिकल तक रोका गया!

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  • नजीबाबाद डिपो में अफसरशाही की ढाल, 8 दिन बाद भी आरोपी बेखौफ
  • ARM के दबाव में सबूत दबाने का आरोप, महिला सशक्तिकरण के दावे तार-तार
  • टीआई की दबंगई, विभाग बना मूकदर्शक

नजीबाबाद डिपो में महिला संविदा परिचालक के साथ टीएस द्वारा कथित हाथापाई और अभद्रता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि घटना को आठ दिन बीत चुके हैं, लेकिन न कोई कार्रवाई हुई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने जवाबदेही दिखाई। पूरा परिवहन विभाग मानो मूकदर्शक बना बैठा है।

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सबूत मिटाने की साजिश? मेडिकल तक नहीं कराया गया

कर्मचारियों का गंभीर आरोप है कि ARM के दबाव में पीड़िता का मेडिकल जानबूझकर नहीं कराया गया, ताकि चोटों और घटना से जुड़े अहम सबूत सामने न आ सकें। इस एक कदम ने पूरे मामले को साधारण अनुशासनात्मक प्रकरण से निकालकर संगठित साजिश के दायरे में ला खड़ा किया है।

तीन दिन का भरोसा, आठ दिन की खामोशी

घटना के तुरंत बाद ARM रामप्यारे ने तीन दिन में कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन यह वादा फाइलों में दफन होकर रह गया। कर्मचारियों का आरोप है कि कार्रवाई को जानबूझकर टालने के लिए फाइलें रोकी जा रही हैं और आरोपी को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।

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विवादों से पुराना नाता, फिर वही नाम

टीआई जयगोपाल का नाम महिला कर्मचारियों से बदसलूकी के मामलों में पहले भी सामने आ चुका है। इन्हीं आरोपों के चलते उनका नजीबाबाद से बिजनौर तबादला हुआ था, लेकिन रवैये में कोई सुधार नहीं आया। अब एक बार फिर वही नाम, वही आरोप।

रेस्ट के दिन नशे में वर्कशॉप पहुंचने के आरोप

सूत्रों के अनुसार, रेस्ट के दिन भी कथित तौर पर शराब के नशे में वर्कशॉप पहुंचना और महिला कर्मचारियों से अभद्र व्यवहार करना आम बात रही है। हर बार मामला दबा दिया गया, जिससे आरोपी का हौसला और बढ़ता गया।

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महिला सशक्तिकरण सिर्फ पोस्टरों तक?

सरकार के महिला सशक्तिकरण के दावे इस घटना के बाद खोखले नज़र आते हैं। न पीड़िता को सुरक्षा मिली, न न्याय, और न ही सम्मान। सवाल उठता है—क्या महिला कर्मचारियों की सुरक्षा सिर्फ नारों तक सीमित है?

आंदोलन की चेतावनी

कर्मचारी संगठनों ने दो टूक कहा है कि यदि जल्द ही

  • आरोपी टीएस पर सख्त कार्रवाई
  • मेडिकल न कराने वाले अधिकारियों की जांच
    पीड़िता को न्याय
  • नहीं मिला, तो सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।

सवाल जो जवाब मांगते हैं?

• मेडिकल किसके दबाव में रोका गया?
• आरोपी अब तक सेवा में क्यों बना हुआ है?
• महिला कर्मचारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

विभाग की प्रतिक्रिया | निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई का दावा

मामले पर परिवहन निगम मुख्यालय ने भी प्रतिक्रिया दी है। जीएम (कार्मिक) अंकुर ने कहा कि “प्राप्त हुई जानकारी एवं उपलब्ध कराई गई फ़ोटो के आधार पर प्रकरण की विधिसंवत एवं निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। प्रथम दृष्टया किसी भी जूनियर कर्मचारी से, विशेषकर महिला कर्मचारियों के साथ, अभद्रता स्वीकार्य नहीं है। महिलाओं के साथ किया गया ऐसा आचरण घोर अपराध की श्रेणी में आता है। विभागीय स्तर पर जांच कर दोषी पाए जाने पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी।”

अंकुर
जीएम (कार्मिक), परिवहन निगम मुख्यालय

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महिला परिचालकों का उत्पीड़न अक्षम्य अपराध की श्रेणी में है,इस तरह के मामले केवल महिलाओं के सम्मान ही नहीं बल्कि पूरे विभाग की छवि को दूषित करने वाला है ।परिवहन निगम मुख्यालय से इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सख्त नियम बनाने चाहिए,जिससे फिर किसी महिला या अन्य कर्मियों को लज्जित होने से बचाया जा सके। यदि समय रहते संज्ञान नहीं लिया गया तो संगठन कर्मचारी हितों के लिए आंदोलन के लिए बाध्य होगा 

संतोष कुमार मिश्र 

महामंत्री,संविदा कर्मचारी एकता संघ 

 


डिस्क्लेमर
:समाचार में उल्लिखित आरोप संबंधित कर्मचारियों के बयानों पर आधारित हैं। विभाग अथवा आरोपी पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।

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