बायोमीट्रिक सिस्टम के सामने अटक गई जुड़वा बहनों की पहचान

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  • एक का आधार बना तो दूसरी का आवेदन डुप्लीकेट डेटा बताकर रुकता रहा
  • डीएम की पहल पर UIDAI मुख्यालय ने निकाला तकनीकी समाधान, दोनों बहनों को मिली अलग पहचा

शाहबाज खां जिला संवाददाता रामपुर 

रामपुर। शहर के मोहल्ला खारी कुआं निवासी जुबैर इलियास की जुड़वा बेटियों तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर के लिए आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया कई वर्षों तक परेशानी का कारण बनी रही। दोनों बच्चियों के बायोमीट्रिक डेटा में अत्यधिक समानता के चलते सिस्टम दूसरी बच्ची को अलग व्यक्ति के रूप में पहचान नहीं पा रहा था। इसके चलते एक बच्ची का पहचान पत्र बन गया, जबकि दूसरी का आवेदन बार-बार डुप्लीकेट डेटा बताकर अटक जाता था।

फिंगरप्रिंट और आइरिस डेटा ने खड़ी की तकनीकी चुनौती

आधार पंजीकरण के दौरान एक बच्ची का नामांकन पूरा होने के बाद जब दूसरी बच्ची का बायोमीट्रिक लिया गया तो सिस्टम ने उसके डेटा को पहले से दर्ज रिकॉर्ड से मिलता-जुलता पाया। इसके चलते आवेदन आगे नहीं बढ़ सका। परिवार ने स्थानीय स्तर पर समस्या के समाधान के लिए कई प्रयास किए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।

पहचान पत्र नहीं बन पाने से बच्ची के स्कूल प्रवेश और सरकारी योजनाओं से जुड़े जरूरी कार्यों में भी परिवार को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। जुड़वा बच्चों के बायोमीट्रिक से जुड़े मामलों में UIDAI की व्यवस्था में विशेष तकनीकी प्रक्रिया का प्रावधान है।

डीएम की पहल के बाद मुख्यालय ने निकाला रास्ता

मामला जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने पहल की। मामले को UIDAI मुख्यालय, नई दिल्ली के समक्ष रखा गया। इसके बाद तकनीकी स्तर पर विशेष समाधान निकालते हुए दोनों बच्चियों की अलग-अलग पहचान सुनिश्चित की गई।

आखिरकार तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर के अलग-अलग आधार कार्ड जारी हो गए। वर्षों से चली आ रही समस्या का समाधान होने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली। मामला यह भी दिखाता है कि अत्यधिक समान बायोमीट्रिक विशेषताओं वाले जुड़वा बच्चों के मामलों में सामान्य डुप्लीकेशन जांच के अलावा विशेष तकनीकी हस्तक्षेप की जरूरत पड़ सकती है।

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