- धर्म और जाति से ऊपर उठकर समिति ने निभाया इंसानियत का फर्ज, पितृपक्ष की अमावस्या पर कराया अस्थि विसर्जन
- लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने के साथ निर्धनों को निशुल्क लकड़ी भी उपलब्ध कराती है समिति
रामपुर से शाहबाज़ खान, जिला संवाददाता।
रामपुर। पितृपक्ष की अमावस्या के अवसर पर शमशान भूमि जीणोद्धार समिति की ओर से मानवता की अनूठी मिसाल पेश की गई। गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी समिति के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उन लावारिस शवों की अस्थियों का पूर्ण विधि-विधान, मंत्रोच्चारण और पूजा-अर्चना के साथ ब्रजघाट में विसर्जन कराया, जिनका अंतिम संस्कार करने के बाद एक वर्ष तक कोई अपना उन्हें लेने नहीं पहुंचा।
समिति द्वारा सुरक्षित रखी गई 36 लावारिस शवों की अस्थियों को पितृपक्ष की अमावस्या से एक दिन पूर्व धार्मिक अनुष्ठान के बाद वाहन से ब्रजघाट ले जाया गया। यहां धर्म और जाति के भेद से ऊपर उठकर सभी दिवंगत आत्माओं की मोक्ष की कामना करते हुए विधि-विधान से अस्थियों का विसर्जन किया गया। इस दौरान ब्राह्मणों को भोजन भी कराया गया।
समिति के अध्यक्ष राजीव कुमार मांगलिक ने बताया कि संस्था प्रत्येक वर्ष लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर उन्हें सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देने का कार्य करती है। अंतिम संस्कार के बाद उनकी अस्थियों को सुरक्षित रखा जाता है और पितृपक्ष में धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार उनका विसर्जन कराया जाता है।
उन्होंने बताया कि समिति शमशान परिसर में अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी, उपले और अन्य आवश्यक सामग्री उचित मूल्य पर उपलब्ध कराती है। वहीं असहाय और निर्धन परिवारों के अंतिम संस्कार के लिए निशुल्क लकड़ी भी उपलब्ध कराई जाती है।
समिति के अनुसार इस वर्ष 36 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराया गया था। इनके परिजनों अथवा किसी परिचित के सामने नहीं आने के बाद अस्थियों को सुरक्षित सहेजकर रखा गया और पितृपक्ष के अवसर पर ब्रजघाट में विधिवत प्रवाहित किया गया।
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष राजीव कुमार मांगलिक, कोषाध्यक्ष वीरेश सिंघल, संजय गुप्ता, राजेंद्र अग्रवाल, श्रेष्ठ जिंदल, उमेश सक्सेना, बाबूराम, राजेंद्र प्रेम सहित समिति के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।


