- 12वीं में टॉप करने के बाद शैक्षणिक अभिलेखों की सत्यता पर उठे थे सवाल
- जांच में कथित अनियमितताएं सामने आने के बाद बोर्ड ने की कार्रवाई

लखनऊ। फर्जी शैक्षणिक अभिलेखों और नाम व जन्मतिथि में कथित हेरफेर के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश संस्कृत बोर्ड की 12वीं परीक्षा के टॉपर रहे रजनीश यादव की डिग्रियां निरस्त कर दी गई हैं। जांच के दौरान उनके शैक्षणिक अभिलेखों को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद बोर्ड ने यह कार्रवाई की है।
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रजनीश यादव ने संस्कृत बोर्ड की 12वीं परीक्षा में टॉप कर सुर्खियां बटोरी थीं। हालांकि, बाद में उनके शैक्षणिक दस्तावेजों की सत्यता और अभिलेखों में दर्ज नाम व जन्मतिथि को लेकर सवाल उठे। शिकायतों के आधार पर मामले की जांच कराई गई, जिसमें कथित तौर पर दस्तावेजों में हेरफेर के तथ्य सामने आए।
जांच के बाद संबंधित अभिलेखों को अमान्य मानते हुए उनकी डिग्रियां निरस्त करने का निर्णय लिया गया। इस कार्रवाई के बाद संस्कृत बोर्ड की परीक्षा व्यवस्था और अभिलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
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मामले में अब यह भी जांच का विषय है कि कथित तौर पर गलत अभिलेखों के आधार पर परीक्षा में टॉप करने तक की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई और संबंधित स्तरों पर दस्तावेजों का सत्यापन किस तरह किया गया। यदि अभिलेखों में हेरफेर की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
रजनीश यादव की डिग्रियां निरस्त किए जाने की कार्रवाई ने संस्कृत बोर्ड की परीक्षा और प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।





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