- नो एंट्री खुलने से पहले डबल-ट्रिपल लाइन में खड़े हो रहे ट्रक, आम जनता परेशान
- यातायात पुलिस की तैनाती पर उठे सवाल, व्यवस्था सुधारने और जिम्मेदारी तय करने की मांग
रायबरेली। शहर में रात नौ बजे के बाद ट्रकों की आवाजाही को लेकर यातायात व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि नो एंट्री खुलने का निर्धारित समय आने से पहले ही प्रमुख मार्गों और निकास बिंदुओं पर ट्रकों की लंबी कतारें लगने लगती हैं। कई स्थानों पर ट्रक डबल-ट्रिपल लाइन में खड़े हो जाते हैं, जिससे सड़क पर वाहनों के आवागमन के लिए जगह कम पड़ जाती है। इसका खामियाजा आम नागरिकों को जाम में फंसकर भुगतना पड़ता है।
स्थानीय यातायात व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ट्रकों की कतारों को नियंत्रित करने की जरूरत होती है, तब संबंधित स्थानों पर पुलिस की प्रभावी मौजूदगी क्यों नजर नहीं आती? हालांकि, पुलिस की तैनाती और कार्रवाई की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
डबल-ट्रिपल लाइन से बढ़ती परेशानी
सड़क किनारे और मार्गों पर ट्रकों की दोहरी-तिहरी कतारें लगने से छोटे वाहन चालकों, दोपहिया सवारों, नौकरीपेशा लोगों और अन्य राहगीरों को निकलने में परेशानी होती है। यातायात का दबाव बढ़ने पर जाम की स्थिति बन जाती है। ऐसी अव्यवस्था में एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों के आवागमन में भी बाधा उत्पन्न होने की आशंका रहती है।
शहरवासियों के सामने सवाल यह है कि जब नो एंट्री का समय निर्धारित है, तो उससे पहले ही सड़कों पर ट्रकों की कतारें लगने से रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई देती? क्या संबंधित मार्गों पर निगरानी पर्याप्त है और क्या नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है?
यातायात व्यवस्था सुधारने की मांग
इस समस्या से राहत दिलाने के लिए जरूरी है कि नो एंट्री के निर्धारित समय और नियमों को स्पष्ट किया जाए। ट्रकों के प्रवेश मार्गों पर समयानुसार पुलिसकर्मियों की तैनाती, नियमित निगरानी और सड़क पर अव्यवस्थित ढंग से खड़े वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
रायबरेली में यातायात व्यवस्था सुचारु रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि नो एंट्री खुलने से पहले ही ट्रकों की कतारें जाम का कारण बन रही हैं, तो संबंधित विभागों को इसकी समीक्षा कर ठोस कदम उठाने चाहिए। अब देखना होगा कि पुलिस और यातायात प्रशासन इस समस्या पर क्या कार्रवाई करता है और शहरवासियों को जाम से कितनी राहत मिलती है।



