प्रयागराज में विकास के दावों की खुली पोल, गंगा रिवर फ्रंट रोड पर नाली-सीवर का पानी; जगह-जगह सड़क धंसी, पर्यटकों की बढ़ी मुसीबत
प्रयागराज में महाकुंभ से पहले करीब 95 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई 9 किलोमीटर लंबी गंगा रिवर फ्रंट रोड अब बदहाली की तस्वीर बनती जा रही है। रसूलाबाद घाट से नागवासुकी तक बनाई गई इस सड़क पर इन दिनों विकास नहीं, बल्कि नाली, नाले और सीवर का गंदा पानी बहता नजर आ रहा है।
बताया जा रहा है कि सड़क के करीब 18 से 20 स्थानों पर पानी और गंदगी जमा है। कई जगह सड़क धंसने से इसकी गुणवत्ता और रखरखाव पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस रास्ते को महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुगम और आधुनिक मार्ग के तौर पर तैयार किया गया था, वही अब आने-जाने वालों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है।
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गंगा किनारे बने इस मार्ग को मुंबई के मरीन ड्राइव की तर्ज पर विकसित करने की योजना थी। मकसद साफ था—श्रद्धालुओं और पर्यटकों को गंगा किनारे से संगम तक सुगम रास्ता मिले और शहर के भीतर यातायात का दबाव भी कम हो।
सड़क को बाढ़ और गंगा का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित रखने के लिए बोल्डर क्रेट, इंटरलॉकिंग सतह और मजबूत स्लोप पिचिंग तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई थी।
लेकिन सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये खर्च करके सड़क को आधुनिक और मजबूत बनाया गया था, तो कुछ ही समय में नाली और सीवर का पानी सड़क पर क्यों बह रहा है?
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करोड़ों की सड़क, जिम्मेदारी किसकी?
रोज हजारों पर्यटक और श्रद्धालु इस रास्ते से संगम की ओर जाते हैं। ऐसे में सड़क पर जमा गंदा पानी न सिर्फ शहर की छवि खराब कर रहा है, बल्कि राहगीरों की सुरक्षा और सुविधा पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
महाकुंभ के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर जिस सड़क को प्रयागराज के विकास का मॉडल बताया गया था, उसकी मौजूदा हालत अब सिस्टम की निगरानी और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
- 95 करोड़ की सड़क पर गंदा पानी आखिर किसकी नाकामी है?
- नाला-सीवर का पानी सड़क पर पहुंचने से पहले जिम्मेदार विभागों की नजर क्यों नहीं पड़ी?
- और सबसे बड़ा सवाल—करोड़ों खर्च होने के बाद भी जनता को साफ-सुथरी और सुरक्षित सड़क कब मिलेगी?
विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच गंगा रिवर फ्रंट की यह तस्वीर एक सवाल छोड़ रही है—क्या करोड़ों की योजनाओं का हिसाब सिर्फ उद्घाटन तक ही सीमित है?





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