मासूम की मौत पर सड़कों पर उतरा गुस्सा, भाजपा विधायक की गाड़ी पर चढ़ गईं महिलाएं

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  • डेढ़ घंटे तक भीड़ के बीच फंसे रहे विधायक राजकुमार पोरी, ग्रामीणों ने लगाए ‘विधायक चोर है’ के नारे
  • 15 लोगों की मौत के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से भड़का आक्रोश, वन विभाग और सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन

पौड़ी। उत्तराखंड के पौड़ी जिले में गुलदार के हमले में चार वर्षीय मासूम आरुषि की मौत ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया। मासूम की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने मंगलवार रात पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग स्थित खांड्यूसैंण में जमकर हंगामा किया। इस दौरान मौके पर पहुंचे भाजपा विधायक राजकुमार पोरी को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि प्रदर्शनकारी महिलाओं ने विधायक की गाड़ी के बोनट पर चढ़कर विरोध जताया, जबकि आक्रोशित भीड़ ने वाहन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।

बताया जाता है कि इस दौरान विधायक ने तीन बार जिलाधिकारी और एक बार वन मंत्री को फोन कर मदद मांगी, लेकिन शुरुआती प्रयासों में फोन रिसीव नहीं हुआ। काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। बाद में पुलिस ने मोर्चा संभाला और कड़ी मशक्कत के बाद विधायक को सुरक्षित भीड़ से बाहर निकाला।

15 मौतों के बाद भी नहीं जागा सिस्टम, ग्रामीणों ने उठाए सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में गुलदार और अन्य वन्यजीवों का आतंक लंबे समय से बना हुआ है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, वन्यजीवों के हमलों में अब तक करीब 15 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए कोई स्थायी और प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों और घटनाओं के बावजूद वन विभाग की कार्रवाई केवल औपचारिकताओं तक सीमित रही।

मासूम आरुषि की मौत के बाद ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक पहाड़ के लोग अपने बच्चों और परिवारों को वन्यजीवों के हमलों में खोते रहेंगे? ग्रामीणों ने गुलदार को तत्काल पकड़ने, प्रभावित क्षेत्रों में पिंजरे लगाने, नियमित गश्त बढ़ाने और संवेदनशील गांवों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की।

घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष और सरकारी तंत्र की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मासूम की मौत के बाद भड़का जनाक्रोश इस बात का संकेत है कि ग्रामीण अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने को तैयार नहीं हैं। उन्हें सुरक्षा के ठोस इंतजाम चाहिए।

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