पर्यूषण पर्व में धर्म आराधना के साथ आत्मशुद्धि पर जोर
पारसनाथ मंदिर में भजन प्रतियोगिता तो आदिनाथ मंदिर में प्रश्न मंच ने बांधा समां
शाहबाज ख़ाँ, जिला संवाददाता
रामपुर। पर्यूषण पर्व के आध्यात्मिक वातावरण में जैन समाज के दोनों प्रमुख मंदिर इन दिनों धर्म, भक्ति और आत्मचिंतन के केंद्र बने हुए हैं। दस धर्मों की आराधना के क्रम में शनिवार को उत्तम शौच धर्म की आराधना की गई। मंदिरों में पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों के बीच श्रद्धालुओं को बताया गया कि वास्तविक शौच केवल शरीर की स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि मन को लोभ, लालच, ईर्ष्या, द्वेष और कपट जैसे विकारों से मुक्त करना ही सच्चा शौच धर्म है।
*संतोष और आत्म-संतुष्टि है शौच धर्म का आधार*
मथुरा 84 कोस से पधारे नमन जैन शास्त्री ने उत्तम शौच धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका मूल आधार संतोष और आत्म-संतुष्टि है। मनुष्य के पास जितना अधिक होता जाता है, उसकी इच्छाएं भी उतनी ही बढ़ती जाती हैं। अधिक धन, वस्तुओं और सुख-सुविधाओं की चाह मन को निरंतर अशांत कर सकती है।
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उन्होंने कहा कि उत्तम शौच धर्म मनुष्य को अनावश्यक इच्छाओं पर नियंत्रण रखने और उपलब्ध साधनों में संतोष का अनुभव करने की प्रेरणा देता है। संतोषी व्यक्ति सीमित साधनों में भी सुख और शांति प्राप्त कर सकता है, जबकि लोभ से ग्रसित व्यक्ति बहुत कुछ हासिल करने के बाद भी भीतर से असंतुष्ट रह सकता है।
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*आवश्यकता और लालच के बीच अंतर समझना जरूरी*
मथुरा 84 कोस से आए शास्त्री अजब जैन ने कहा कि उत्तम शौच धर्म मनुष्य को अपनी आवश्यकताओं को सीमित रखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता और लालच के बीच अंतर समझना बेहद जरूरी है। जरूरत पूरी करना जीवन का हिस्सा है, लेकिन जरूरत से अधिक संग्रह करने की इच्छा व्यक्ति को परिग्रह की ओर ले जा सकती है।
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उन्होंने कहा कि दूसरों की वस्तुओं, संपत्ति और सुख-सुविधाओं को देखकर मन में लालच पैदा करने के बजाय व्यक्ति को अपने जीवन में संतोष और संयम को स्थान देना चाहिए। सरल जीवन, सीमित आवश्यकताएं और शुद्ध विचार उत्तम शौच धर्म की भावना को मजबूत करते हैं।
*पारसनाथ मंदिर में भजन प्रतियोगिता*
उत्तम शौच धर्म के अवसर पर पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भक्ति गीतों की मधुर स्वर लहरियों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान के प्रति श्रद्धा और धर्म के प्रति समर्पण की भावना व्यक्त की।
*आदिनाथ मंदिर में प्रश्न मंच ने बढ़ाई रौनक*
वहीं आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रश्न मंच का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं के साथ बच्चों और युवाओं ने भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। धार्मिक विषयों से जुड़े प्रश्नों के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने ज्ञान और जैन धर्म की शिक्षाओं की समझ का प्रदर्शन किया।
आयोजकों के अनुसार, प्रश्न मंच जैसे कार्यक्रम धार्मिक सिद्धांतों को रोचक तरीके से समझाने और नई पीढ़ी को धर्म एवं संस्कारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दोनों मंदिरों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। भक्ति, ज्ञान और आत्मचिंतन के इस वातावरण में उत्तम शौच धर्म ने संतोष, संयम और मन की पवित्रता का संदेश दिया। श्रद्धालुओं को बताया गया कि बाहरी सुख-सुविधाओं से अधिक महत्वपूर्ण वह आंतरिक शांति है, जो संतोष और शुद्ध विचारों से प्राप्त होती है।


