कटरी धर्मपुर में बाढ़ का कहर, राहत की नाव पर किराए का सवाल

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  • ग्रामीणों का आरोप—नाव से आवागमन के लिए 25 से 50 रुपये तक वसूले जा रहे; प्रशासन से जांच और स्थिति स्पष्ट करने की मांग

मोहम्मद इसरार जिला संवाददाता 

फर्रुखाबाद। कटरी धर्मपुर क्षेत्र में बाढ़ का कहर जारी है। जलभराव और आवागमन बाधित होने से ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है। गांव से बाहर निकलने, जरूरी सामान लाने और मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए नाव ही ग्रामीणों का प्रमुख सहारा बनी हुई है।

इसी बीच नाव के किराए को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नाव से आवागमन के लिए कथित तौर पर 25 से 50 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। बाढ़ की स्थिति में मजबूरी के चलते लोगों को जरूरी कामों के लिए भी यह रकम चुकानी पड़ रही है।

राहत व्यवस्था पर उठे सवाल

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि नाव प्रशासन की राहत व्यवस्था के तहत संचालित की जा रही है, तो फिर लोगों से किराया क्यों लिया जा रहा है? वहीं यदि नाव निजी स्तर पर संचालित हो रही है, तो बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के लिए सुरक्षित और सुगम आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था कौन करेगा?

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर ठेकेदार या अन्य जिम्मेदार लोगों द्वारा अपनी मर्जी से कार्य किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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प्रशासन से जांच की मांग

बाढ़ के संकट में नाव ग्रामीणों के लिए महज परिवहन का साधन नहीं, बल्कि जीवनरेखा बनी हुई है। ऐसे में नाव के संचालन, किराए और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच जरूरी बताई जा रही है।

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ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके पर जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि नाव किसके आदेश पर संचालित हो रही है, क्या इसके लिए किराया निर्धारित है और यदि राहत कार्य के लिए नाव उपलब्ध कराई गई है तो ग्रामीणों से वसूली किस आधार पर की जा रही है।

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नोट: ग्रामीणों द्वारा लगाए गए किराए वसूली के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के आधार पर नहीं हुई है। प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।

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