- सात शर्तों के पूरा होने पर ही सामान्य आवाजाही बहाल करने की बात, तेल और शिपिंग बाजार पर बढ़ा दबाव
तेहरान/दुबई। हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान ने अपना रुख और सख्त कर दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा है कि अमेरिका के साथ जून में हुए अंतरिम समझौते से जुड़ी सात शर्तें पूरी होने तक हॉर्मुज स्ट्रेट में सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल नहीं की जाएगी। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान प्रस्ताव रखा था कि निर्धारित शर्तें पूरी होने की स्थिति में सात दिनों के भीतर सामान्य समुद्री यातायात बहाल किया जा सकता है।
हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में शामिल है। युद्ध से पहले वैश्विक कच्चे तेल और LNG आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा इस समुद्री मार्ग से होकर गुजरता था। ऐसे में यहां लंबे समय तक जारी रहने वाला तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
यमन में भी सैन्य अभियान तेज, बाब-अल-मंदेब के पास बढ़ा तनाव
इसी बीच यमन में भी सैन्य गतिविधियां तेज होने की खबर है। सऊदी समर्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार ने हूती नियंत्रण वाले क्षेत्रों को वापस लेने के लिए सैन्य अभियान शुरू किया है। Reuters के मुताबिक सरकारी बलों ने बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास कुछ महत्वपूर्ण इलाकों में बढ़त बनाने का दावा किया है। उन्हें सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर से हवाई समर्थन मिलने की भी जानकारी सामने आई है।
हालांकि हूती बलों की ओर से सरकारी बलों के कुछ दावों का खंडन किया गया है। बाब-अल-मंदेब और हॉर्मुज दोनों ही वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हैं। दोनों क्षेत्रों में एक साथ बढ़ते तनाव से तेल टैंकरों की आवाजाही, समुद्री बीमा और माल ढुलाई की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। यदि हॉर्मुज संकट लंबे समय तक जारी रहता है और समुद्री परिवहन तथा बीमा लागत बढ़ती है, तो इसका असर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के साथ भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
तेल की कीमतों में लगातार तेजी आने की स्थिति में पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत, महंगाई और रुपये की विनिमय दर पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि केवल हॉर्मुज संकट को भारत में पेट्रोल-डीजल की किसी निश्चित कीमत वृद्धि का सीधा कारण मानना अभी जल्दबाजी होगी।
वैश्विक तेल बाजार में कीमतें केवल आपूर्ति पर निर्भर नहीं करतीं। शिपिंग और बीमा लागत, टैंकरों की उपलब्धता, रिफाइनिंग क्षमता तथा वैकल्पिक समुद्री मार्ग भी कीमतों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में हॉर्मुज संकट का असर सिर्फ इस बात से नहीं तय होगा कि कितना तेल उपलब्ध है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वह तेल सुरक्षित और कितनी लागत में अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच पाता है।
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