- DGP शत्रुजीत कपूर की कुर्सी पर खतरा, IPS आलोक मित्तल बन सकते हैं नए पुलिस प्रमुख
- मामले में दलित एंगल उभरने के बाद भाजपा सरकार पर कड़ा दबाव बनता जा रहा है।
- सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री नायक सैनी जल्द ही बड़ी कार्रवाई कर सकते हैं, और डीजीपी शत्रुजीत कपूर की कुर्सी खतरे में है।
शुभ्रांशु चड्ढा
चंडीगढ़ | विशेष रिपोर्ट
हरियाणा के युवा IPS अधिकारी पूरन कुमार की संदिग्ध आत्महत्या मामले ने अब राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। जैसे-जैसे इस मामले में दलित एंगल उभर कर सामने आ रहा है, वैसे-वैसे भाजपा सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ता जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार और पुलिस महकमे के भीतर इस मामले को लेकर गहमागहमी तेज है। माना जा रहा है कि राज्य के डीजीपी शत्रुजीत कपूर की कुर्सी खतरे में है।
पूरन कुमार मामला – क्या है पूरा घटनाक्रम
कुछ दिन पहले हरियाणा के एक वरिष्ठ IPS अधिकारी पूरन कुमार ने संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली थी। शुरुआती जांच में व्यक्तिगत तनाव की बात कही गई थी, लेकिन अब परिवार और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि अधिकारी को जातिगत भेदभाव और प्रशासनिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था।
दलित संगठनों ने इसे “सिस्टमेटिक हैरेसमेंट” का मामला बताते हुए सीबीआई जांच और वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
सरकार पर बढ़ा दबाव
सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री नायक सैनी की सरकार पर अब कई दलित और विपक्षी संगठनों का जबरदस्त दबाव है कि वह मामले में कड़ा कदम उठाए।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, इस मुद्दे को लेकर विपक्ष भी सरकार को घेरने की तैयारी में है।
इसी बीच, DGP शत्रुजीत कपूर पर सवाल उठने लगे हैं — कहा जा रहा है कि पूरन कुमार की शिकायतें बार-बार ऊपरी स्तर तक पहुंचाई गई थीं, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
DGP बदलने की चर्चा तेज
मिली जानकारी के अनुसार, सरकार डीजीपी स्तर पर फेरबदल पर गंभीरता से विचार कर रही है।
IPS आलोक मित्तल (बैच 1993, हरियाणा कैडर) ने हाल ही में मुख्यमंत्री सैनी से मुलाकात की है। माना जा रहा है कि वे नए डीजीपी के रूप में सबसे प्रबल दावेदारों में शामिल हैं।
आलोक मित्तल को एक सख्त, ईमानदार और प्रशासनिक रूप से सक्षम अधिकारी माना जाता है। उन्होंने पहले गुरुग्राम, रोहतक और अपराध शाखा में कई अहम पदों पर काम किया है।
क्या है राजनीतिक मायने
पूरन कुमार की मौत सिर्फ एक पुलिस केस नहीं रही — यह अब सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन चुकी है।
दलित संगठनों ने साफ कहा है कि अगर न्याय नहीं मिला तो वे राज्यव्यापी आंदोलन करेंगे।
भाजपा सरकार के लिए यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक, बल्कि छवि प्रबंधन का भी बड़ा संकट बनता जा रहा है, खासकर तब जब दलित वर्ग राज्य की वोट राजनीति में निर्णायक भूमिका रखता है।
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राजनीतिक गलियारों में क्या है चर्चा
हरियाणा पुलिस महकमे में मची हलचल के बीच अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री सैनी के अगले कदम पर हैं।
क्या डीजीपी कपूर को हटाया जाएगा?
क्या आलोक मित्तल को नई जिम्मेदारी मिलेगी?
और सबसे बड़ा सवाल — क्या IPS पूरन कुमार को न्याय मिलेगा?
आने वाले कुछ दिन हरियाणा की राजनीति और पुलिस प्रशासन — दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
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