- डीसी राजेश धीमान ने हरी झंडी दिखाकर वैनों को किया रवाना, किसानों को पराली न जलाने के लिए किया जाएगा जागरूक
- सीआरएम मशीनरी के इस्तेमाल पर जोर, कृषि विभाग देगा तकनीकी सहायता
बठिंडा, 22 सितंबर। (सुरेश रहेजा, प्रवीण कुमार, साहिल रहेजा)
धान की कटाई के सीजन के मद्देनजर पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए बठिंडा जिला प्रशासन ने जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान के नेतृत्व में जिला प्रशासन और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से किसानों को धान की पराली के उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए तीन मोबाइल जागरूकता वैन रवाना की गईं।
डीसी राजेश धीमान ने इन वैनों को हरी झंडी दिखाकर गांवों के लिए रवाना किया। ये वैन आने वाले दिनों में जिले के विभिन्न गांवों में पहुंचकर किसानों को पराली न जलाने और फसल अवशेषों के वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन के बारे में जानकारी देंगी।
पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता को नुकसान
डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि पराली जलाने से केवल पर्यावरण ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि इसका असर मिट्टी की उर्वरता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकार की ओर से सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जा रही क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (सीआरएम) मशीनरी का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
उन्होंने कहा कि कृषि मशीनरी के माध्यम से खेत में ही पराली का उचित प्रबंधन किया जा सकता है। प्रशासन का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के बजाय उसके बेहतर प्रबंधन के लिए व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध कराना है।
कृषि विभाग से तकनीकी मदद लेने की अपील
मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. हरप्रीतपाल कौर ने भी किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीव-जंतु और आवश्यक पोषक तत्व प्रभावित होते हैं, जिससे जमीन की उपजाऊ शक्ति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
उन्होंने किसानों से कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर पराली प्रबंधन से जुड़ी तकनीकी जानकारी और मशीनरी का लाभ उठाने को कहा। जागरूकता वैनों के माध्यम से किसानों को गांव-गांव जाकर पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी जाएगी।


