- कोट समीर के किसान अमरीक सिंह ने राउंड बेलर मशीन से पराली के गट्ठे बनाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
बठिंडा, 23 अक्टूबर। धान की पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने और फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने के लिए किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने की जरूरत है। बठिंडा जिले के गांव कोट समीर के प्रगतिशील किसान अमरीक सिंह पुत्र जागीर सिंह ने राउंड बेलर मशीन की मदद से धान की पराली के गट्ठे तैयार कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल की है।
किसान अमरीक सिंह ने आधुनिक मशीनरी का इस्तेमाल कर यह संदेश दिया कि पराली को आग लगाए बिना भी उसका उचित प्रबंधन किया जा सकता है। इससे वायु प्रदूषण कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद मिल सकती है। उनकी यह पहल अन्य किसानों को भी फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए प्रेरित कर रही है।
पराली जलाने से मिट्टी की सेहत पर पड़ता है असर
मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. हरप्रीत पाल कौर ने किसान अमरीक सिंह के प्रयास की सराहना करते हुए जिले के किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। साथ ही मिट्टी और पानी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है तथा जमीन में मौजूद लाभकारी जीवों को भी नुकसान पहुंचता है। इससे मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने की आशंका रहती है।
सहकारी समितियों से मशीनें लेकर करें पराली का प्रबंधन
डॉ. हरप्रीत पाल कौर ने किसानों को सलाह दी कि वे सहकारी समितियों और उपलब्ध अन्य माध्यमों से बेलर समेत फसल अवशेष प्रबंधन में उपयोग होने वाली आधुनिक मशीनों का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि प्रगतिशील किसान अपने आसपास के अन्य किसानों को भी पराली नहीं जलाने और पर्यावरण अनुकूल तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करें, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ खेती को टिकाऊ बनाया जा सके।



