- सुपर सीडर से तीन एकड़ में गेहूं की बुवाई, अन्य किसानों को भी मशीनों के इस्तेमाल की सलाह
- पराली खेत में मिलाने से बढ़ती है मिट्टी की उर्वरता, जलाने से पर्यावरण को नुकसान: डॉ. हरप्रीत पाल कौर
बठिंडा, 24 अक्टूबर। पंजाब के बठिंडा जिले के गांव फूस मंडी के प्रगतिशील किसान परमजीत सिंह पुत्र मेहमा सिंह ने धान की पराली का खेत में ही प्रबंधन कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल की है। किसान ने तीन एकड़ जमीन में सुपर सीडर मशीन की मदद से पराली को मिट्टी में मिलाकर गेहूं की बुवाई की। उनकी इस पहल को क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है।
इस दौरान बठिंडा की मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. हरप्रीत पाल कौर ने किसान परमजीत सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए जिले के किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने के बजाय आधुनिक कृषि मशीनों की मदद से फसल अवशेषों का खेत में ही प्रबंधन करें।
12 एकड़ जमीन पर खेती, शेष खेत में भी मशीनों से बुवाई की तैयारी
किसान परमजीत सिंह ने बताया कि उनके पास कुल 12 एकड़ कृषि भूमि है। मौजूदा सीजन में उन्होंने तीन एकड़ जमीन पर हैप्पी सीडर से गेहूं की बुवाई की है। जल्द ही शेष नौ एकड़ जमीन पर भी मशीनों की सहायता से बुवाई करने की योजना है। उन्होंने बताया कि मशीनों से बुवाई करने के बाद भी गेहूं की पैदावार पहले की तरह बनी रही है।
पराली जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व और पर्यावरण होते हैं प्रभावित
मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. हरप्रीत पाल कौर ने कहा कि धान की पराली को खेत में मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके विपरीत, पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है तथा मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीवों और पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने छोटे और मध्यम किसानों से विशेष अपील की कि जिन किसानों के पास अपनी कृषि मशीनें उपलब्ध नहीं हैं, वे संबंधित सहकारी समितियों से उपलब्ध मशीनों का लाभ लेकर पराली का उचित प्रबंधन करें। उन्होंने प्रगतिशील किसानों से भी आग्रह किया कि वे अपने अनुभव साझा करके दूसरे किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए प्रेरित करें।
इस अवसर पर इंजीनियर गुरजीत विर्क, डॉ. असमानप्रीत सिंह, कृषि विकास अधिकारी डॉ. दविंदर सिंह, सुखदीप सिंह (जूनियर टेक्नीशियन), अमनवीर कौर (एएसआई), गुरमिलाप (बीटीए) और जगप्रीत सिंह (एटीएम) सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
सुरेश रहेजा, प्रवीण कुमार, साहिल रहेजा



