- मोहनपुरवा और खलारी में भारी मशीनों से बालू लोडिंग का दावा, जीपीएस कैमरे के फोटो-वीडियो का हवाला
- डीएम ने कार्रवाई का दिया आश्वासन, जांच के बाद साफ होगी खनन की वैधता
अरविंद श्रीवास्तव, जिला संवाददाता
बांदा। नरैनी तहसील क्षेत्र के मोहनपुरवा और खलारी में कथित बालू खनन को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नदी क्षेत्र में दिनदहाड़े पोकलैंड और जेसीबी जैसी भारी मशीनों से बालू की खुदाई कर ट्रकों और मिनी ट्रकों में लोडिंग कराई जा रही है। आरोपों के सामने आने के बाद प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जीपीएस कैमरे से फोटो-वीडियो बनाए जाने का दावा
पुकारी गांव निवासी समाजसेवी रामकिशोर उपाध्याय की ओर से जीपीएस कैमरे से बनाए गए फोटो और वीडियो उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है। दावा है कि इन तस्वीरों और वीडियो में नदी क्षेत्र में बालू की लोडिंग दिखाई दे रही है। उपाध्याय के मुताबिक उन्होंने मामले की जानकारी दूरभाष के माध्यम से जिलाधिकारी बांदा को दी, जिस पर डीएम ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
स्थानीय चर्चाओं में कुछ नाम, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
स्थानीय चर्चाओं में कथित खनन गतिविधि को लेकर श्यामू पटेल तथा जिला पंचायत सदस्य मीराबाई पटेल के भाई और मोहनपुरवा निवासी प्रियांशु उर्फ ठोकिया पटेल के नाम लिए जा रहे हैं। हालांकि, इन व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और उनका पक्ष भी सामने नहीं आया है। इसलिए इन नामों का उल्लेख केवल स्थानीय चर्चाओं और आरोपों के संदर्भ में किया जा रहा है।
मामले को लेकर क्षेत्राधिकारी नरैनी से संपर्क किए जाने पर उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। वहीं, स्थानीय स्तर पर रात के समय ट्रैक्टरों से कथित अवैध वसूली किए जाने की चर्चा भी है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दूसरी ओर, स्थानीय पुलिस की ओर से इसे राजस्व विभाग से संबंधित मामला बताए जाने की बात कही जा रही है।
जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि यदि नदी क्षेत्र में भारी मशीनों से खुलेआम बालू की खुदाई और वाहनों में लोडिंग हो रही है तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी है या नहीं। यदि खनन नियमों के विपरीत पाया जाता है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि खनन वैध है तो संबंधित अनुमति एवं निर्धारित नियमों के पालन की स्थिति क्या है—इन सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगा।
अब जिलाधिकारी के कार्रवाई के आश्वासन पर क्षेत्रवासियों की निगाहें टिकी हैं। मौके पर जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मोहनपुरवा और खलारी में बालू खनन के लिए वैध अनुमति थी या नहीं तथा किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
फिलहाल कथित बालू खनन का मामला नरैनी क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासनिक जांच और कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।


