मासूम बच्ची का पैर काटने वाले डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग

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  • पीड़ित पिता ने जिलाधिकारी को सौंपा शिकायती पत्र, निष्पक्ष जांच और न्याय की लगाई गुहार

अरविंद श्रीवास्तव जिला संवाददाता 

बांदा। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मासूम बच्ची का पैर काटे जाने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। पीड़ित परिवार ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिवार का आरोप है कि उपचार में कथित लापरवाही के चलते बच्ची को अपना पैर गंवाना पड़ा और वह जिंदगी भर के लिए दिव्यांग हो गई।

23 दिसंबर को हादसे के बाद मेडिकल कॉलेज में हुई थी भर्ती

कोतवाली नगर क्षेत्र के ग्राम पड़ुई निवासी अनिल कुमार पुत्र शिवशरण ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि 23 दिसंबर 2025 को उनकी पुत्री मानवी ऊंचाई से गिर गई थी। हादसे में उसके बाएं पैर की जांघ की हड्डी टूट गई थी। परिजन उसे उपचार के लिए रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां उसे इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया गया।

शिकायत के अनुसार, हड्डी रोग विभाग में तैनात डॉ. विनीत कुमार सिंह के उपचार के दौरान बच्ची की हालत बिगड़ती गई। पीड़ित पिता ने चिकित्सक पर घोर लापरवाही और समुचित उपचार उपलब्ध न कराने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बाद में बच्ची का पैर काटना पड़ा, जिसके कारण वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो गई।

मेडिकल कॉलेज की जांच पर भी उठाए सवाल

पीड़ित परिवार का कहना है कि मामले की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज स्तर पर गठित समिति ने इसे आकस्मिक जटिलता बताते हुए डॉ. विनीत कुमार सिंह सहित जूनियर डॉक्टर को क्लीन चिट दे दी। परिवार ने इस जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

अनिल कुमार ने जिलाधिकारी से मामले की दोबारा जांच कराकर उपचार के दौरान हुई घटनाओं और चिकित्सकीय निर्णयों की पड़ताल कराने तथा यदि लापरवाही प्रमाणित हो तो संबंधित चिकित्सक के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की है। अब पीड़ित परिवार की शिकायत पर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर लोगों की नजरें टिकी हैं।

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