क्रोध त्यागकर क्षमा को अपनाएं, आत्मशुद्धि का पर्व है दस लक्षण : ब्रह्मचारी नन्हें भैया

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अरविंद श्रीवास्तव | जिला संवाददाता बांदा

बांदा। जैन समाज के प्रमुख धार्मिक पर्व पर्युषण एवं दस लक्षण पर्व का बुधवार 16 सितंबर से विधिवत शुभारंभ हो गया। 25 सितंबर तक चलने वाले इस पर्व को लेकर शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों और कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो गया है। सुबह से ही जैन धर्मावलंबी मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना, अभिषेक, जिनवाणी पाठ एवं धार्मिक क्रियाओं में शामिल हो रहे हैं।

दिगंबर जैन मंदिर में महामस्तकाभिषेक के साथ शुरुआत

पर्व के शुभारंभ अवसर पर दिगंबर जैन मंदिर में भगवान का महामस्तकाभिषेक किया गया। वहीं तारण तरण दिगंबर जैन मंदिर में मां जिनवाणी के पठन-पाठन एवं श्रवण के साथ धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। मंदिरों में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

पहले दिन मनाया गया उत्तम क्षमा धर्म

दस लक्षण पर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म मनाया गया। इस अवसर पर ब्रह्मचारी नन्हें भैया ने श्रद्धालुओं को क्षमा धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि क्रोध को त्यागकर क्षमा को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दस लक्षण पर्व केवल बाहरी आडंबर का पर्व नहीं, बल्कि आत्मा में जमी विषय-कषायों की परत को हटाकर आत्मशुद्धि करने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि क्षमा मनुष्य के जीवन में शांति और आत्मिक शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। क्रोध से मन अशांत होता है, जबकि क्षमा का भाव आत्मिक उन्नति की दिशा में ले जाता है।

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भोजन त्याग ही नहीं, आत्मचिंतन है उपवास

ब्रह्मचारी नन्हें भैया ने कहा कि उपवास का अर्थ केवल भोजन का त्याग करना नहीं है। आत्मा के नजदीक जाना और उसके गुणों का चिंतन करना ही उपवास को सार्थक बनाता है। उन्होंने पर्व के दौरान संयम, साधना और आत्मचिंतन पर विशेष ध्यान देने का संदेश दिया।

जीवन में उतारने का संकल्प

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दस लक्षण पर्व के दौरान जैन समाज के अनुयायी उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम सत्य, उत्तम शौच, उत्तम संयम, उत्तम अकिंचन, उत्तम अपरिग्रह, उत्तम तप, उत्तम त्याग और उत्तम ब्रह्मचर्य जैसे गुणों पर चिंतन करते हैं। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इन गुणों को अपने आचरण में उतारने का संकल्प लिया जा रहा है। पर्व के दौरान आत्मचिंतन, संयम, तप और साधना को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

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