अमेरिका-ईरान तनाव का असर: कच्चा तेल 108 डॉलर के करीब, भारत की बढ़ी चिंता

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  • ब्रेंट क्रूड चार महीने के उच्च स्तर पर, सप्लाई बाधित होने की आशंका से कीमतों में तेज उछाल
  • महंगा कच्चा तेल भारत का आयात बिल, रुपये और महंगाई पर डाल सकता है दबाव

 

नई दिल्ली, 11 सितंबर 2026। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा पश्चिम एशिया में तेल और समुद्री मार्गों पर बढ़ते हमलों का असर वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 108.68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 103.45 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। दोनों प्रमुख बेंचमार्क करीब चार महीने बाद फिर 100 डॉलर के पार हैं।

हॉर्मुज और लाल सागर पर संकट से बढ़ी चिंता

ईरान से जुड़े हूती समूह द्वारा यमन के मोचा बंदरगाह पर कब्जे और लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते खतरे ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास टैंकरों पर हमलों की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यह मार्ग दुनिया के महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है।

बाजार में आशंका है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है या तेल परिवहन बाधित होता है तो कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर से और ऊपर जा सकती हैं। कुछ विश्लेषकों ने ऐसे हालात में ब्रेंट के 120 डॉलर के आसपास पहुंचने की संभावना भी जताई है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी का सीधा असर देश के तेल आयात बिल पर पड़ता है। महंगे कच्चे तेल से डॉलर की मांग बढ़ सकती है, जिससे रुपये पर दबाव और व्यापार घाटे में बढ़ोतरी की आशंका रहती है।

फिलहाल घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी तय नहीं मानी जा रही है, लेकिन अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 100-110 डॉलर से ऊपर बना रहता है तो तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक सरकारी तेल विपणन कंपनियों को मौजूदा स्तरों पर पेट्रोल में करीब 5 रुपये और डीजल में करीब 23 रुपये प्रति लीटर का विपणन घाटा हो रहा है।

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महंगाई और आम आदमी पर भी असर संभव

Alarm तेल की कीमत बढ़ने से केवल पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि परिवहन, माल ढुलाई, विमानन, रसायन, प्लास्टिक और अन्य ऊर्जा-आधारित उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।

बाजार की नजर अब पश्चिम एशिया पर

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका-ईरान तनाव कितना लंबा चलता है और होर्मुज तथा लाल सागर के प्रमुख समुद्री मार्गों से तेल की आपूर्ति कितनी प्रभावित होती है। संघर्ष में और विस्तार हुआ तो कच्चे तेल की कीमतों में एक और तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

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